अयोध्या। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में आदिकवि वाल्मीकि की विरासत पूरे गौरव से प्रवाहमान है। रामनगरी के सैकड़ों मंदिरों में प्रतिदिन रामायण पाठ का आयोजन किया जाता है तो मणिरामदास की छावनी स्थित वाल्मीकि रामायण भवन आदिकवि की विरासत को जीवंत करता प्रतीत होता है। यह एक ऐसा मंदिर है जहां रामायण के सभी 24 हजार श्लोक दीवारों पर अंकित हैं। यह न सिर्फ वाल्मीकि की समृद्घ विरासत को दर्शाता है कि बल्कि हजारों, लाखों भक्तों की आस्था का भी केंद्र है।
वाल्मीकि रामायण भवन आदि कवि की रचना रामायण को समर्पित है। मणिरामदास की छावनी के कई प्रकल्प हैं उन्हीं में से एक वाल्मीकि रामायण भवन है जो आदि कवि के महान योगदान का स्मरण कराता है। यह दिव्य-भव्य भवन न सिर्फ अयोध्या की आध्यात्मिक भव्यता का परिचायक है बल्कि आस्था का केंद्र भी है। सफेद संगमरमर से आच्छादित सभागार की आंतरिक सतह पर वाल्मीकीय रामायण के सभी 24 हजार श्लोक अंकित हैं। यह भवन करीब एक दर्जन स्तंभों पर आधारित है। यहां गर्भगृह में भगवान राम के पुत्र लव एवं कुश विराजमान हैं तो इसी के साथ आदि कवि महान ऋषि वाल्मीकि की भव्य प्रतिमा स्थापित है।
मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास बताते हैं कि रामायण भवन के निर्माण की शुरूआत पूज्य गुरूदेव श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास की प्रेरणा से सन् 1965 में हुई। करीब दस सालों में यह भव्य इमारत तैयार हुई। वे बताते हैं गुरूदेव द्वारा रामनगरी स्थित कई स्थानों पर बड़ी संख्या में प्रकल्प स्थापित किए गए हैं लेकिन करीब पांच दशक से वाल्मीकी रामायण भवन न सिर्फ स्थाप्तय कला का नायाब नमूना है बल्कि रामायण के सभी 24 हजार श्लोक यहां अंकित है जो भक्तों, श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। संगमरमर की दीवार पर रामायण के श्लोकों को क्रमवार बहुत ही करीने से अंकित किया है। यहां रामायण के सभी कांडों का अंकन किया गया है।
मणिरामदास की छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास के शिष्य संत आनंद शास्त्री बताते हैं कि हजारों लोग इस मंदिर का दर्शन प्रतिदिन करने आते हैं। कोरोना काल में भक्तों की संख्या कम हुई है नहीं तो प्रतिदिन यहां हजारों भक्तों की भीड़ जमी रहती थी। यहां संगमरमर की दीवारों पर अंकित रामायण के श्लोक श्रद्घालुओं को आकर्षित करते हैं तो संस्कृत के जानकार श्रद्घालु-भक्त प्रत्येक श्लोक को पढ़ने के बाद इसका मर्म समझने की भी कोशिश मंदिर के साधु-संतों से करते हैं। वे बताते हैं कि मेलों में तो प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्घालु इस मंदिर का दर्शन करने आते हैं, भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।