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विधायक रामचंद्र व पूर्व ब्लाक प्रमुख समेत तीन को कोर्ट ने किया बरी

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अयोध्या। मिल्कीपुर तहसील प्रशासन ने बिना वसूली प्रमाण पत्र व गिरफ्तारी वारंट के ही बकायेदार को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद तत्कालीन विधायक रामचंद्र यादव, ब्लॉक प्रमुख राम प्रगट यादव व बकाएदार के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करवा दिया। असलियत अदालत ने खुली और पत्रावली पर गिरफ्तारी अधिपत्र और वसूली प्रमाण पत्र न होने से कोर्ट ने तीनों को दोषमुक्त कर दिया।
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यह आदेश विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोर्ट भूदेव गौतम की अदालत से हुआ। घटना 23 अगस्त 2000 की बताई गई। तहसील मिल्कीपुर के चपरासी ओम प्रकाश द्वारा तहसीलदार को इस आशय का प्रार्थना पत्र दिया गया कि 22 अगस्त की रात वह तहसील की हवालात मैं ड्यूटी पर था। बकायेदार राम मगन हवालात में बंद था।रात लगभग 8:30 बजे विधायक रामचंद्र यादव ,ब्लाक प्रमुख राम प्रगट यादव अपने 15,16 समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और हवालात का ताला खुलवाकर बकायेदार राम प्रगट यादव को जबरदस्ती छुड़ा ले गए।
इस प्रार्थना पत्र पर तहसीलदार सहदेव की संस्तुति व उप जिलाधिकारी राम मूरत पांडेय के आदेश पर तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। अदालत में अपने सफाई साक्ष्य में राम मगन ने बताया कि भट्ठा मालिक सालिक राम उपजिलाधिकारी के गांव का था, इसलिए उन्होंने उसे गलत ढंग से फंसाकर गिरफ्तार किया। इसकी जानकारी एसडीएम को दी गई तो उनके मौखिक आदेश पर उसे छोड़ दिया गया। फर्जी गिरफ्तारी के लिए राममगन तहसील प्रशासन पर मुकदमा न कर दे, इसलिए फर्जी मुकदमा कायम करा दिया गया।
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अदालत में गवाही के दौरान उपजिलाधिकारी राम मूरत पांडेय यह नहीं साबित कर पाए की गिरफ्तारी का वारंट किसने जारी किया और किसके आधार पर गिरफ्तारी हुई। पत्रावली में गिरफ्तारी वारंट और वसूली प्रमाण पत्र भी नहीं मिला। इस पर कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए टिप्पणी किया कि तहसील प्रशासन का यह कृत्य उसी प्रकार का कृत्य है कि बिना बुनियाद के कोई दीवार खड़ी कर दी जाए और न्यायिक प्रक्रिया में तथ्यों का परीक्षण करने पर वह भरभरा कर ढह जाए।
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