भेलसर। कार्रवाई से बचने के लिए तालाबों पर किए गए कब्जादारों ने पालिका पर ही मुकदमा कर दिया है। अब नगर पालिका अपने 59 तालाबों का अस्तित्व बचाने के लिए वर्षों से न्यायालय चक्कर लगा रही है। लेकिन, तारीख पर तारीख के चलते तालाबों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
लोगों ने अपने स्वार्थ आगे तालाब महत्व को भुला दिया। तालाबों का पानी जमीन के अंदर जाकर पानी का जल स्तर का लेबल को बनाए रखने अच्छी भूमिका निभाते है। जिसके कारण भूमि का जलस्तर घटने के बजाय बराबर बनाए रहता है। तालाब जल के स्थाई स्रोत हैं, जो हमें प्रकृति द्वारा उपहार स्वरूप मिले हैं। वर्षा जल संचयन का सबसे अच्छा माध्यम भी तालाब होता है। सरकार जल संरक्षण के लिए ग्रामीण अंचलों में ब्लॉक द्वारा तालाबों की खोदाई कर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है तो पालिका क्षेत्र में सरकारी तालाबों की पटाई कर मकान व दुकान का निर्माण कराने में पीछे नहीं है, जिसमें तहसील के राजस्व कर्मियों की भी भूमिका संदिग्ध है। पूर्वजों ने प्रकृति की इस अनमोल धरोहरों की रक्षा की। इसे सजाया और संवारा, जिससे भविष्य में लोगों को इसका लाभ मिले। लेकिन, नई पीढ़ी के लोगों ने पूर्वजों की इन अनमोल धरोहरों की उपेक्षा की।
विरासत में मिले अनमोल उपहार की उपेक्षा के कारण आज लोगों के समक्ष पेयजल की समस्या उत्पन्न हो गई है। आज पौराणिक और ऐतिहासिक तालाबों का अस्तित्व मिटता जा रहा है। रुदौली नगर पालिका परिषद अंतर्गत अधिकांश तालाबों पर अतिक्रमणकारी काबिज हैं। कुछ तालाबों का तो अस्तित्व ही खत्म हो गया, जो बचे हुए है। उनमें कब्जेदारों ने मत्स्य पालन का कार्य कर रहे हैं, जिसकी फूटी कौड़ी भी नगर पालिका नसीब नहीं हो रही है। पालिका की माने तो अगर ये सभी तालाब कब्जेदारों से मुक्त हो जाए तो इनकी सफाई कराकर मत्स्य पालन करने का ठेका देने पर प्रति वर्ष लाखों रुपये की राजस्व आय बढ़ जाती है, तथा वार्डों में जल भराव की समस्या से कुछ हद तक निजात मिल जाती। हाल ये कि अतिक्रमणकारियों कहीं तालाब की पटाई कर मकान बना लिया तो कहीं दर्जनों दुकान बनाकर खड़ी कर दी, जो तालाब बचे भी है, उन्हें धीरे-धीरे पाटकर उसका अस्तित्व समाप्त करने पर तुले हैं।
इससे जिले से लेकर स्थानीय प्रशासन की लाचारी भी जगजाहिर है। नगर में तालाब के साथ दर्जनों कुएं विलुप्त होने के कगार पर हैं। लेकिन, बीते कुछ सालों से तालाब की भूमि पर भू-माफियाओं ने नजर गड़ा रखी है। तालाब पर साल दर साल अतिक्रमणकारियों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है। लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे मोहल्ले में जनसंख्या बढ़ती गई तालाब का दायरा भी सिमटता गया। विभागीय उपेक्षा के कारण तालाब में मिट्टी खोदाई, सफाई आदि नहीं की गई। जिस कारण तालाब लगभग मृतप्राय हो रहा है। नगर के सतींद्र कुमार शास्त्री बताते हैं कि तालाब हमारी संस्कृति की पहचान है। लेकिन, समय बदला तो लोग घर-घर हैंडपंप लगा लिए। इसके बाद सबमर्सिबल और मोटर आ गया। वर्षा जल संचयन की आवश्यकता होती है।
पालिका के 59 तालाबों पर लोगों का कब्जा है। जिसका न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। नगर पालिका कब्जेदारों से तालाबों को मुक्त कराने के लिए न्यायालय का चक्कर लगा रही है। अवैध कब्जेदारों से तालाबों के मुक्त होने पर सफाई व सौंदर्यीकरण भी कराया जाएगा। तालाबों की सफाई हो जाने से भूमि के जल स्तर पर काफी प्रभाव पड़ेगा। जिस नगर पालिका में इतने तालाब हों वहां जलस्तर में गिरावट आना संभव नहीं है।
- रणविजय सिंह. अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद रुदौली।