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बीज उत्पादन से कृषक बढ़ाएं अपनी आय

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मसौधा। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के अंतर्गत दक्षता अभिवृद्धि प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित एकीकृत कृषि प्रणाली द्वारा उधमिता विकास प्रशिक्षण के समापन पर उप कृषि निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने प्रशिक्षणार्थियों को एकीकृत कृषि प्रणाली के विषय के बारे में जानकारी दी। साथ ही केंद्रीय कृषि विभाग एवं उत्तर प्रदेश सरकार की समस्त योजनाओं के बारे में किसानों को रूबरू कराया।
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कहा कि सभी किसान कृषि विभाग से सदैव संपर्क में रहें, जिससे प्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हें अति शीघ्र प्राप्त हो सके। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा पर आयोजित प्रशिक्षण में उन्होंने किसानों से अपने खेतों पर धान की फसल की कटाई के उपरांत पराली को खेत में कदापि न जलाने की गुजारिश की।
कहा कि उसका उपयोग कंपोस्ट खाद तैयार कर मृदा की उत्पादकता बढ़ाने में उपयोग करें। जिससे कि मृदा की उत्पादकता भी बढ़ाई जा सके एवं वातावरण को भी सुरक्षित रखा जा सके। पादप प्रजनन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ दीक्षित ने प्रशिक्षणार्थियों को आय संवर्धन को बीज उत्पादन से आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
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केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. शशिकांत यादव ने कहा कि खेती की लगातार घट रही जोत के चलते आर्थिक संकट से जूझ रहे किसानों के लिए एकीकृत कृषि प्रणाली वरदान साबित होगी तथा केंद्र की गतिविधियों की जानकारी के साथ मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन पर जानकारी दी। साथ ही मधुमक्खी पालन एवं मशरूम उत्पादन कर आय संवर्धन करने के लिए प्रशिक्षणार्थियों को प्रेरित किया।
प्रशिक्षण संयोजक, विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने एकीकृत कृषि प्रणाली की आवश्यकता, सिद्धांत, घटक एवं फसल उत्पादन सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि किसान इस तकनीक को अपनाते हैं तो कृषि के साथ ही अन्य रोजगार के अवसर, फसल चक्र के प्रयोग से जमीन की उर्वरता में सुधार, उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग एवं पूरे वर्ष रोजगार के साथ ही आमदनी में बढ़ोतरी होने पर किसान एवं मजदूरों का गांव से शहरों की तरफ होने वाले पलायन को रोका जा सकता है, साथ ही इस प्रणाली को अपनाकर हम मृदा उत्पादकता को बरकरार रखते हुए अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं, ऑफ सीजन सब्जी उत्पादन को लो टनल पाली हाउस के नीचे पौध तैयार करने की तकनीक के साथ वानिकी की विषय पर चर्चा की।
डॉ. दीपक सिंह ने पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मत्स्य पालन आदि पर चर्चा की। प्रशिक्षण में शिव शंकर सिंह, सुनील कुमार दुबे का सराहनीय योगदान रहा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 35 प्रवासी श्रमिकों ने प्रतिभाग किया। समापन उपरांत सभी प्रशिक्षणार्थियों को केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष एवं डॉ. सौरभ दीक्षित ने प्रमाण पत्र का वितरण किया।
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