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चीनी मिल अगले वर्ष भी देगी कड़वाहट

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भेलसर। भुगतान में की गई देरी पर ब्याज मिलना किसानों का हक है। चीनी मिल साल भर भुगतान न करने के बाद भी किसानों को ब्याज की फूटी कौड़ी भी नहीं देती है। जबकि किसानों पर बैंक, बिजली आदि का कर्ज बढ़ता जाता है। समय पर भुगतान न होने से किसान कंगाली के दौर से गुजर रहा है। किसानों की आरसी काटी जा रही है। किसान की दुर्दशा होने के बाद भी उसकी कोई सुध लेने को तैयार नहीं है।
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किसान यूनियन रुदौली तहसील प्रभारी अजय कुमार शर्मा ने कहा कि कोर्ट ने भी चीनी मिलों को विलंब भुगतान पर ब्याज देने का आदेश दिया है। यह नियम पहले से हैं लेकिन चीनी मिलों ने किसानों को आज तक ब्याज नहीं दिया है। ब्याज तो दूर मूल धनराशि के लिए भी किसान चीनी मिल का चक्कर काट रहे हैं।
रौजागांव चीनी मिल ने 28 मार्च तक किसानों के गन्ना का भुगतान कर चुकी है। अभी हजारों किसानों के गन्ना का पूर्ण भुगतान नहीं किया गया है। सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह किसानों को जल्द से जल्द बकाया भुगतान की अदायगी कराने के साथ ही नियत समय पर नया पेराई सत्र भी चालू करवाए।
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लॉकडाउन के दौरान नकदी संकट झेल रहीं चीनी मिलों और किसानों के लिए अगला साल भी मुश्किलें खड़ी करने वाला है। कम खपत के चलते चीनी मिलों को चीनी बेचने में दिक्कत आ रही है तो क्रूड आयल सस्ता होने से एथेनाल की मांग भी घटी है। इन वजहों से चीनी मिलें नकदी संकट झेल रही हैं, जो अगले साल और बढ़ने के आसार हैं। माना जा रहा है कि किसानों को गन्ना बेचने और भुगतान की समस्या भी खड़ी होगी।
हमारा देश सबसे अधिक चीनी पैदा करता है और खपत भी करता है लेकिन लॉकडाउन से पहले जो खपत होती थी वह नहीं हो पा रही है। चीनी मिलों के स्टाक में चीनी भरी हुई है। अगले साल इसके और बढ़ने के आसार हैं।
जाहिर है कि अगर चीनी नहीं बिकेगी तो किसानों के भुगतान में दिक्कत आएगी। जानकारों का कहना है कि ये जो 70 प्रतिशत चीनी की खपत भारत में होती है। शीतल पेय बनाने वाली कंपनियां, आइसक्रीम, मिठाई की दुकानों, शादी समारोहों पर सबसे अधिक चीनी की खपत होती है। जो लॉकडाउन के कारण ठप है। इस समय सिर्फ घरों में सप्लाई हो रही है।
चीनी मिलों का स्टाक में ज्यादा कमी नहीं आई है, बिक्री न होने से नकदी का संकट भी पैदा हो रहा है। अगर एक्सपोर्ट और चीनी की खपत नहीं बढ़ी तो अगले साल चीनी के मूल्य दबे रहेंगे।
साथ ही अगले सीजन में किसानों के भुगतान पर संकट गहरा सकता है। चीनी मिलें पूरे साल चीनी बेच कर अपना खर्च चलाती हैं और किसानों को भुगतान भी करती रहती हैं। अगर चीनी नहीं बिकेगी तो अगले साल के स्टाक में जुड़ जाएगी और अगले गन्ने के सीजन की चीनी भी आ जाने से स्टाक बढ़ेगा तो अधिक चीनी खपानी होगी।
...किसानों के बोल :ग्राम हलीमनगर निवासी शोभालाल यादव इस खतरे को भांप रहे हैं। कहते हैं उनके गांव में बहुत गन्ना खेतों में खड़ा है। अब अगर मिलों की चीनी नहीं बिकेगी तो समस्या अगले साल और बढ़नी ही है, जिसका सीधा असर हम किसानों पर पड़ेगा।
देवकली पुरवा निवासी किसान मालिकराम कहते हैं कि किसानों को अब तक अपने ही गन्ना का मूलधन नहीं मिल पाया है। बिजली बिल बकाया वसूली में किसानों के बिजली कनेक्शन भी काटे जा रहे हैं। किसान अनेक समस्याओं से जूझ रहा है।
रसूलपुर निवासी रामकुमार का कहना है कि रौजागांव मिल पर गन्ने का लगभग एक लाख रुपये बकाया है, जिस कारण परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। कैथी निवासी रामसमुझ कहते हैं कि चीनी मिल पर हजारों रुपये गन्ने का बकाया है ऐसे में उन्हें उधारी लेकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। सरकार भी कुछ मदद नहीं कर रही है।
किसानों के गन्ना का बकाया भुगतान की एक और किस्त एक या दो दिनों में खाते में पहुंच जाएगी। जिसकी कार्यवाई चल रही है। जल्द ही किसानों का संपूर्ण बकाया का भुगतान कर दिया जाएगा।
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- राम इकबाल, सिंह, महाप्रबंधक केन, रौजागांव चीनी मिल
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