अयोध्या। फसल अवशेषों को खेतों में जलाने के बजाय सड़ाकर जैविक खाद बनाने या मिट्टी में मिला दें, जिससे खेत की उर्वरा शक्ति तो बनी ही रहेगी और साथ-साथ खाद के खर्च पर करीब दो हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की बचत भी होगी।
यह बातें बुधवार को गांधी सभागार में कृषि विभाग की ओर से आयोजित एक दिवसीय जागरूकता अभियान गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने किया।
किसानों को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि पराली खेतों में न जलाने विषय पर सभी ग्राम पंचायतों में गोष्ठी कराई जाएगी।
कहा कि किसानों को उनका हक मिल जाए व किसानों को उनका हक उन तक पहुंचा दिया जाए, यह बड़ी बात है। सभी अधिकारी व कर्मचारी किसान के हित का ध्यान रखते हुए ही कार्य करें। मुख्य विकास अधिकारी प्रथमेश कुमार ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से वातावरण प्रदूषित होने के साथ-साथ मिट्टी के पोषक तत्वों में अत्याधिक क्षति एवं मिट्टी के भौतिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी पड़ता है।
उप कृषि निदेशक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से वायु की गुणवत्ता में कमी आती है और आंखों में जलन, त्वचा रोग तथा सूक्ष्म कणों के कारण जीर्ण हृदय एवं फेफड़े की बीमारी भी होती है। कहा कि बिना पात्र होते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे लोग व गलती से जिन अपात्र लोगों के खातों में धनराशि चली गई है, वह पैसा लोग सरकार को वापस कर दें।
गोष्ठी का संचालन करते हुये प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र मसौधा डॉ. शशीकांत यादव ने फसल अवशेषों को खेत की मिट्टी में मिलाने से होने वाले लाभ व हानि के बारे में बताया। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने रवी में बोई जाने वाली फसलें के बीज, खाद की उपलब्धता व विभागीय योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
गोष्ठी में उप जिलाधिकारी विजय कुमार मिश्रा, भूमि संरक्षण अधिकारी सुभाष चंद्र वर्मा, एसडीएम सदर ज्योति सिंह, उप परियोजना निदेशक आत्मा प्रवीन बरनवाल, खंड विकास अधिकारी ज्योति शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सौरभ दीक्षित, डॉ. बिंदेश्वरी प्रसाद आदि मौजूद रहे।