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कृषि विधेयक के विरोध में भाकियू ने किया रोड जाम करके प्रदर्शन

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अयोध्या। संसद से पास तीन कृषि विधेयकों की वापसी की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन द्वारा तहसीलों पर धरना-प्रदर्शन करके अधिकारियों को पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कई इलाके में मुख्य मार्ग जाम करके नारेबाजी की। इससे कुछ समय के लिए आवागमन में भी दिक्कत हुई।
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भाकियू के राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा के नेतृत्व में फैजाबाद-अंबेडकरनगर मार्ग को मया विकासखंड के सामने जाम करके प्रदर्शन किया गया। प्रधानमंत्री को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन खंड विकास अधिकारी डॉ सुभाष चंद्र वर्मा को सौंपा गया। इस दौरान तहसील प्रभारी शोभाराम यादव, महेंद्र वर्मा, जगदीश यादव आदि मौजूद रहे। रुदौली तहसील में मवई मार्ग को तहसील अध्यक्ष अमरेश यादव, केशवराम यादव, शंकर पाल पांडेय, कामता प्रसाद वर्मा आदि ने जाम करके एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
जिला मुख्यालय पर तहसील के सामने तिकोनिया पार्क में धरना दिया गया, जबकि भाकियू के प्रदेश सचिव दिनेश दूबे के नेतृत्व में कमिश्नरी गेट के पास जाम जगाकर प्रदर्शन किया। मिल्कीपुर प्रतिनिधि के अनुसार, तहसील में तहसील अध्यक्ष राजेश मिश्रा के नेतृत्व में वेद प्रकाश पांडे, बाबूराम तिवारी, रामसुमेर भारती, सिद्धू भारती आदि ने फैजाबाद-रायबरेली मार्ग जाम कर उप जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
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बीकापुर तहसील में तहसील अध्यक्ष संतोष वर्मा के नेतृत्व में पिपरी-अंबेडकर नगर मार्ग को तारुन विकासखंड के सामने जाम किया गया। इस दौरान राम शुभम भारती, रामगोपाल मौर्य, राजमणि दुबे आदि मौजूद रहे।
सोहावल प्रतिनिधि के अनुसार, टोल प्लाजा तहसीनपुर रौनाही में लगभग दो घंटे भाकियू ने धरना दिया, लेकिन उच्च अधिकारियों के साथ मौजूद भारी पुलिस बल के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने की मंशा यूनियन के नेताओं की पूरी नहीं हो सकी। तहसीलदार मजिस्ट्रेट सोहावल प्रमेश कुमार को ज्ञापन देने तक विरोध प्रदर्शन सीमित रहा।
यूनियन के साथ कांग्रेस के नेता जयकरन वर्मा ने भी अपनी भागीदारी निभाई। इस दौरान सूर्यनाथ वर्मा, फरीद अहमद, नकुल पांडेय, सुल्तान खान, दिलीप रावत, पार्वती, सुशीला आदि मौजूद रहे।
सभी धरना-प्रदर्शन के दौरान भाकियू कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के विरोध में नारेबाजी किया और तीनों विधेयकों को किसान विरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग किया। राष्ट्रीय सचिव घनश्याम वर्मा ने कहा कि ऐसा कानून बनाया जाए, जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम की खरीददारी पर दंडित करने की व्यवस्था हो तथा स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट पूरी तरह लागू की जाए।
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