अयोध्या। हम जिस पेशे से जुड़े हैं वह समाज सेवा का पेशा है। हमारे पूर्वज इस पेशे में जीविकोपार्जन के लिए नहीं आते थे, लेकिन अब परिवर्तन हुआ है अब इस पेशे में लोग जीविकोपार्जन के लिए भी आ रहे हैं।
अधिवक्ताओं को अपना केस पूरी तैयारी के साथ पीठासीन अधिकारी के समक्ष रखना चाहिए। इससे धन तो मिलता ही है, समाज में अधिवक्ता की कीर्ति और मुकदमों में भी बढ़ोतरी होती है। उसके पक्षकार को न्याय मिलता है । यह कहना था बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के चेयरमैन जानकी शरण पांडेय का।
वे बतौर मुख्य अतिथि बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह में बोल रहे थे उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें कोरोना काल में भी वकीलों के लिए कोई मदद नहीं कर रही है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सीमित संसाधन में प्रदेश के कई बार एसोसिएशन को 10 करोड़ 90 लाख रुपये दे चुकी है। चेयरमैन ने बार एसोसिएशन को लाइब्रेरी देने की घोषणा करते हुए कहा कि जब भी यहां के पदाधिकारी बार काउंसिल आएंगे, उन्हें ई-लाइब्रेरी मुहैया करा दी जाएगी।
जिला जज ज्ञान प्रकाश तिवारी ने कहा कि उन्होंने नौकरी के शुरुआती दिनों में यहां से जो ज्ञान प्राप्त किया, उसे ही जहां-जहां गया वहां वहां बिखेरा। जज और वकील का कोई और रिश्ता नहीं होता, बल्कि दोनों एक सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के वजूद से ही न्यायिक अधिकारियों का भी वजूद है।
निर्बल गरीब और तड़पती रूह को न्याय दिलवाने का बीड़ा उठाने का काम केवल वकील ही कर सकता है। यही नहीं न्यायिक अधिकारियों के कार्यों का जज भी वकील ही होता है। कार्यक्रम की शुरुआत बार काउंसिल के चेयरमैन ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। बार एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों ने नव निर्वाचित पदाधिकारियों को माल्यार्पण कर पदभार ग्रहण कराया।
एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन कृपाल चंद्र खरे ने बार के सभी नव निर्वाचित पदाधिकारियों को निर्वाचन प्रमाण पत्र दिया।
समारोह को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष राकेश पाठक, प्रशांत सिंह अटल, जय नारायण पांडेय, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। समारोह में आए हुए सभी मुख्य अतिथियों को अंगवस्त्रम और राम दरबार की प्रतिमा स्मृति के रूप में भेंट की गई। संचालन अधिवक्ता देश दीपक मिश्र ने किया।