डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि प्रशासन अपने 45 वें स्थापना दिवस पर विवि की भूमि पर अवैध कब्जे को हटाने की ठानी है। विवि प्रशासन ने कुलपति की देखरेख में अपनी गाटा संख्या 334 की भूमि चिह्नित की है। विवि ने अपने बोर्ड स्थापित कर 50 एकड़ से अधिक भूमि पर काबिज अवैध कब्जेदारों को आगाह किया है। बुधवार भूमि की पैमाइश के साथ विवि अपना पिलर स्थापित करेगा। विवि की भूमि गाटा संख्या 334 पर 118 लोगों का कब्जा है।
अवध विवि का 45 वां स्थापना दिवस सोमवार को था। विवि ने भाषणबाजी व कार्यक्रम के इतर हटकर अपनी भूमि को अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराने की ठानी। पूर्वाह्न 11 बजे के आसपास कुलपति मनोज दीक्षित के नेतृत्व में कार्य परिषद सदस्य ओमप्रकाश सिंह, कुलानुशासक प्रो. आरएन राय, सहायक अभियंता आरके सिंह व जनसंपर्क अधिकारी आशीष मिश्र सहित कई अन्य प्रोफेसर भूमि के पास पहुंचे।
यह भूमि गोरखपुर-लखनऊ हाईवे पर नाका ओवर ब्रिज के खत्म होने के सामने से लेकर एआईटी कैंपस के सामने तक है। विवि प्रशासन ने अपनी भूमि गाटा संख्या 334 पर बोर्ड लगाया। बताया जा रहा है कि इस भूमि पर 118 लोग कब्जेदार हैं। इसमें लोगों ने पक्के मकान के अलावा दुकानें व अपने प्रतिष्ठान स्थापित कर रखे हैं। विवि प्रशासन ने बोर्ड स्थापित करने के बाद मीडिया से बताया है कि बुधवार को भूमि की पैमाइश राजस्व विभाग के सहयोग से कराई जाएगी।
इसी के विवि प्रशासन अपने पिलर का निर्माण कर बाउंड्रीवाल स्थापित करेगा। बाद में विवि प्रशासन जिला प्रशासन के सहयोग से अवैध कब्जेदारों को हटाएगा। विवि के सहायक अभियंता आरके सिंह ने बताया है कि विवि अपने परिसर के विस्तार के साथ कई बड़ी परियोजनाएं नए भूमि पर विकसित करेगा।अवध विवि के ठीक पीछे घोसियाना नाम का एक मोहल्ला है। मोहल्लेवासियों ने विवि की काफी भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा था।
विवि प्रशासन की ओर से अवैध कब्जे को हटाते हुए रास्ते के विवाद को भी खत्म किया गया है। इसमें विवि प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इस बार भी गाटा 334 को खाली कराने में विवि प्रशासन को कड़ी मेहनत करनी होगी। साथ ही अवैध अतिक्रमण को हटाना भी किसी चुनौती से कम नहीं होगा।विवि प्रशासन की अरबों रुपये कीमत की शहर में 50 एकड़ से अधिक भूमि पर लोगों के घर व दुकानें आबाद होना बगैर विवि प्रशासन की मिलीभगत के कैसे संभव है।
यह सवाल अवैध कब्जेदार ही नहीं, प्रशासन व आम लोग भी उठा रहे हैं। हाल यह है कि गाटा संख्या 334 विवि की भूमि है। यह विवि प्रशासन को काफी समय से मालूम है। इस भूमि पर पूर्ववत 10 वर्षों से लगातार निर्माण हो रहा था, लेकिन विवि प्रशासन की ओर से कोई नोटिस या अवैध निर्माण को रोकने का कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया। अब जब आसपास का इलाका पूरी तरह से विकसित हो गया तो विवि प्रशासन ने अपनी भूमि के अधिपत्य का बोर्ड स्थापित कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार इसमें काफी लोगों का नुकसान होगा।