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अयोध्या सांस्कृति राष्ट्रवाद की जननी: अश्वनी चौबे

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अयोध्या। अयोध्या दुनिया की सबसे पवित्र भूमि है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जननी है। महान भारत का सपना यहीं से पिरोया गया है। राम धरती के कण-कण में, जन-जन में हैं। उन्हें कैसे भूला जा सकता है। एक लंबे संघर्ष के बाद राम मंदिर पर निर्णय आने के बाद प्रत्येक देशवासी ने इसे हृदय से स्वीकारा है।
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जनभावनाओं की इच्छा के अनुरूप सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर पर निर्णय दिया है। ये बातें केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्वनी चौबे ने कहीं। वह दो दिवसीय अवध-मिथिला सम्मेलन को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्वनी चौबे ने कहा कि ये प्रकरण राष्ट्रीय व सांस्कृतिक एकता का परिचायक है जो वर्षों से लंबित था। उन्होंने कहा कि राजा हो तो राम जैसा का संदेश विश्वभर में स्थापित करने वाली अवध की धरती का मिथिला से गहरा सांस्कृतिक संबंध है।
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सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने कहा कि अयोध्या और मिथिला के मायने हमारी सांस्कृतिक एवं परंपरा से अंधे हैं। अयोध्या को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना आवश्यक है।
इस पौराणिक नगरी के नेटवर्क को विकसित करने से उन संबंधों को पुनर्जीवित करने का मौका मिलेगा, जिसकी आज आवश्यकता है। अवध में सीता का प्रतिनिधित्व और मिथिला में राम का प्रतिनिधित्व देशवासियों के लिए प्रेरक प्रसंग है।
अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत को संजोने के लिए राम विवाह यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल करने के योग्य है। क्योंकि राम विवाह की परंपरा अवध में सदियों से चली आ रही है। इस परंपरा को संजोए रखना प्रत्येक भारतवासी का नैतिक दायित्व है। विश्व धरोहर में शामिल होने से अयोध्या उस मुकाम पर पहुंचेगी जिसकी वह हकदार है।
विशिष्ट अतिथि व प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि सीताराम विवाह हमारी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। सीताराम विवाह के बिना विवाह का संस्कार इतना गंभीर नहीं हो सकता। इसी लिए विवाह को सांस्कृतिक एवं एतिहासिक मिलन के रूप में भी भारतीय समाज ने अपनाया है।
अयोध्या मेयर ऋषिकेश उपाध्याय ने कहा कि अवध और मिथिला का रिश्ता अद्वितीय है। इस विरासत को पुन: संजोने की आवश्यकता है। अवध और मिथिला के रिश्तों में मर्यादा की झलक सदियों से परिलक्षित हो रही है। जिलाधिकारी अनुज झा ने बताया कि अवध और मिथिला का संबंध विवाह से शुरू होता है।
राम भारतीय समाज के आदर्श माने जाते हैं। मिथिला में प्रत्येक दामाद को राम के स्वरूप से जोड़ा जाता है और सीता को पुत्री एवं शक्ति स्वरूप देखा जाता है। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह ने कहा कि दुनियाभर ने राम को आदर्श माना है।
डॉ. सिंह ने बताया के आज विश्व सांस्कृतिक आदान-प्रादान के लिए रामायण देशों का संगठन बनाये जाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र भेंटकर किया गया। संगीतमयी कुलगीत की प्रस्तुति की गई।
उद्घाटन सत्र में कई देशों के प्रबुद्धजनों के साथ ही विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी, नेपाल में भारत के राजदूत मंजीव सिंह पुरी, रामबहादुर राय, पूर्व विदेश मंत्री नेपाल रमेश नाथ पांडेय, दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र काठमांडू के निदेशक निश्छलनाथ पांडेय, प्रो. एसके सिंह सहित अन्य के शुभकामना संदेश प्रसारित किये गये।
सम्मेलन के बाद शाम को त्रेतायुग का पुनरावलोकन एवं रामायण, अवध की सीता और मिथिला के राम, सीता-राम विवाह, वैवाहिक परंपरा और मूल्य, रामायण सर्किट में संस्कृति और आर्थिक विकास की साक्षी विरासत एवं अयोध्या शोध संस्थान द्वारा अवध और मिथिला पर लोकगीतों का आगाज हुआ है।
लोकगीत सुनकर लोग भावविभोर हो गए। सम्मेलन का संचालन भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने किया। इंडिया थिंक काउंसिल के सौरभ सिंह ने बताया है कि रविवार को भी कार्यक्रम जारी रहेगा। सम्मेलन में श्रीलंका पर्यटन के कलाकार रामायण पर प्रस्तुति दे रहे हैं।
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