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अवध विवि : कर्मचारियों हड़ताल से आवश्यक सेवाएं ठप

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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विवि में कुलपति पर लगे धन के बंदरबांट के आरोपों की सीबीआई जांच को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल से सोमवार को आवश्यक सेवाएं ठप हो गईं। आवश्यक सेवाओं में तैनात कर्मचारी भी कार्य बहिष्कार में शामिल हो गए हैं।
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कर्मचारियों ने कुलपति के इस्तीफे से लेकर प्रति कुलपति को हटाए जाने की मांग की है। दूसरी ओर सोमवार को कार्य बहिष्कार के चलते प्रशासनिक कार्य पूरी तरह बंद रहे। परीक्षा फीस को लेकर आए महाविद्यालयों के लोगों को बैरंग वापस लौटना पड़ा। प्री-पीएचडी में वेबसाइट की दिक्कत को लेकर दिनभर विद्यार्थी कार्यालय का चक्कर काटते रहे लेकिन, समाधान नहीं हो सका।
अवध विवि में कर्मचारी अपनी 28 सूत्रीय मांग को लेकर पिछले सात दिनों से आंदोलनरत हैं। शनिवार को कर्मचारियों ने राजभवन व मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर 23 बिंदुओं पर जांच कराए जाने की मांग की है। हालांकि मामले में स्वंय पर लगे आरोपों की सीबीआई से जांच की संस्तुति कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित की ओर से भी कर दी गई है। जिलाधिकारी ने इसे शासन को संदर्भित भी कर दिया है।
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इसके बावजूद जांच व कार्रवाई होने तक कर्मचारियों ने आंदोलन और तेज करने का सोमवार को निर्णय लिया। आवश्यक सेवाओं पर तैनात कर्मचारी भी कार्य बहिष्कार में शामिल हो गए है। साथ ही संविदा व तदर्थ कर्मचारी अपना कार्य छोड़ धरना स्थल पर पहुंचे। पूरे दिन विवि का काम प्रभावित रहा। प्रशासनिक कार्यालय पर दिन भर ताला लटका रहा। वहीं, हास्टल से लेकर लाइब्रेरी के कामकाज प्रभावित रहे।
इसके अलावा परीक्षा फार्मों के भर जाने के बाद फीस लेकर आए महाविद्यालयों के कर्मचारियों को बैरंग वापस लौटना पड़ा। सर्वाधिक दिक्कत प्री-पीएचडी का परीक्षा फार्म भरने वाले विद्यार्थियों को हुई। वेबसाइट में कुछ दिक्कत आ जाने से इनके परीक्षा फार्म भरने के कार्य नहीं हो सके।
कई प्री-पीएचडी के विद्यार्थी दिनभर विवि कैंपस में घूमते रहे। इसके साथ विभागों के कार्य भी पूरी तरह प्रभावित रहे। सभी कर्मचारी आंदोलन व कार्य बहिष्कार में शामिल रहे। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश पांडेय ने बताया है कि विवि प्रशासन व जिला प्रशासन का कोई भी प्रतिनिधि मिलने नहीं आया, जिससे कार्य बहिष्कार व आंदोलन मंगलवार को भी जारी रहेगा।
विवि में कर्मचारी व अधिकारियों की उठापटक के बीच विश्वविद्यालय कार्य परिषद सदस्य ओमप्रकाश सिंह कुलपति के बचाव में उतर आए हैं। उन्होंने बताया है कि कर्मचारियों के हित में कुलपति की ओर से अनेकों निर्णय लिए हैं। अधिकांश निर्णय उनके द्वारा कार्य परिषद में प्रस्तुत किए थे।
उन्होंने बताया है कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी संविदाकर्मियों के वेतन पुनरीक्षण एवं वेतन वृद्धि, शासनादेश के अनुरूप विगत एक दशक से अधिक लंबित समायोजन, उच्च न्यायालय से स्थगन प्राप्त तीन कर्मियों तथा दिलीप पाल (कर्मचारी संघ पदाधिकारी), राममिलन पाल एवं सुनीता देवी का विनियमितिकरण, मृतक आश्रित कर्मियों का वर्षों से लंबित टाइप टेस्ट संपादित कराया जाना, संविदा कर्मियों का संविदा विस्तरण 5 वर्ष का प्रावधान व आवास आवंटन समिति में कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष का प्रतिनिधि सहित अन्य कई बड़े कार्य शामिल हैं।
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