त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव ने प्रदेश शासन की रणनीति को बदल दिया है। इंदिरा आवास योजना में लाभार्थियों के चयन के लिए सामाजिक आर्थिक जनगणना का फार्मूला छोड़ना पड़ा। पंचायत चुनाव की बाधा से बचने के लिए शासन ने एक बार फिर आवास आवंटन के लिए पुरानी पद्धति को लागू कर दिया है। साथ ही इस पर तेजी से कार्रवाई के लिए निर्देश भी जारी किया है।
प्रदेश शासन ने ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थियों के चयन के लिए नई व्यवस्था लागू किया था। कहा गया था कि अब सन् 2011 में केंद्र सरकार द्वारा कराई गई सामाजिक आर्थिक जनगणना के आधार पर गांव के गरीबों की सूची बनाकर आवास आवंटित किए जाएंगे।
इसके लिए निर्देश भी जारी कर दिया गया था, लेकिन आनन-फानन में प्रदेश शासन ने इस रणनीति को बदल दिया। सूत्रों की मानें तो जिलों के अफसरों की मुख्यालय पर हुई बैठक में यह फरमान जारी किया गया। इसके साथ ही निर्देश भी जारी कर दिया गया।
अब थोड़े बदलाव के साथ पुरानी पद्धति से ही गांव में आवास के लाभार्थियों का चयन किए जाने के लिए कहा गया है। इसके लिए जिले में कार्यशाला का आयोजन करके कार्रवाई की जानकारी भी दे दी गई है। नई व्यवस्था में एक बार फिर स्थायी सूची के साथ ही बीपीएल को आधार बनाया गया है।
इस बदलाव के पीछे यूं तो तर्क केंद्र सरकार द्वारा कराए गए सामाजिक आर्थिक जनगणना का डाटा अपलोड न होने का दिया जा रहा है, लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की बाधा बदलाव का कारण बनी। वास्तव में सामाजिक आर्थिक जनगणना 2011 से पात्रों की सूची तैयार करने में महीनों का समय लगता।
इस दौरान त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने से आवास योजना का काम लटक सकता था। इसीलिए इस साल आवास के लाभार्थियों के चयन की कार्रवाई पुरानी पद्धति से किए जाने के लिए निर्देश दिया गया है।
परियोजना निदेशक एके मिश्र भी मानते हैं कि पंचायत चुनाव के कारण पात्रों का चयन चुनाव के पहले न हो पाता। इससे आवास निर्माण में देरी हो सकती थी। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की जनगणना का डाटा अपलोड होने में भी दिक्कतें आ रही हैं।