अंतिम चरण के मतदान के साथ ही अब ग्रामीणों की निगाह मतगणना पर लग गई है। प्रधान प्रत्याशियों की जीत-हार के कयास लगाने का दौर तेज हो गया है।
चौराहों व चौपालों की चर्चा में समर्थक आंकड़े अपने प्रत्याशी के पक्ष में बता रहे हैं। चुनाव परिणाम की चर्चा में गांवों के जातीय आंकड़े आधार बन रहे हैं।
जिले में पंचायत चुनाव प्रक्रिया लगभग दो माह से चल रही है। बुधवार को चौथे व अंतिम चरण की मतदान प्रक्रिया संपन्न हो गई है। मतगणना 13 दिसंबर को होनी है।
मतदान प्रक्रिया समाप्त होने के बाद गांवों में अब प्रधान पद को लेकर परिणाम की चर्चा तेज हो गई है। गांवों के चौबारों से लेकर चौराहे तक हर तरफ सिर्फ यही चर्चा है कि प्रधान कौन बनेगा?
पंचायत चुनाव ने एक बार फिर गांव में जातीय सियासत के आधार को मजबूत किया है। ऐसा चर्चाओं से साफ होने लगा है। प्रत्येक गांव के संभावित चुनाव परिणाम की चर्चा जातीय आधार पर बांटे जा रहे मतदाताओं की संख्या से हो रही है।
बिरादरी की संख्या के गुणा गणित को लेकर प्रत्याशियों को मिले मतों की गणना की जा रही है। मतदाताओं के लिए की गई अतिरिक्त व्यवस्थाएं भी कई गांवों में जीत के आधार को मजबूत करने की चर्चा में हैं।
सोशल इंजीनियरिंग के माहिर प्रधान प्रत्याशी भी चुनाव परिणाम में भारी माने जा रहे हैं। विभिन्न जातियों में पैठ रखने वाले प्रत्याशियों के साथ ही बड़े चुनाव की तर्ज पर मतदाताओं में तोड़फोड़ के आंकड़े भी गणना में शुमार किए जा रहे हैं।
बीकापुर के रामकरन कहते हैं कि पंचायत चुनाव ने गांव की तासीर खराब कर दी है। चुनाव को जातीय आधार देने से ऐसी स्थिति बनी है।
सोहावल के रामगोविंद बताते हैं कि गांव में वोटरों को लुभाने के लिए की गई व्यवस्था ने चुनाव प्रभावित किया। शोभनाथ व भोलाराम कहते हैं कि जो जिस प्रत्याशी के साथ थे मतगणना के पहले तक उनकी नजर में वही प्रत्याशी जीत रहा है।