फैजाबाद-सोमवार को सिविल लाइन स्थित नर्सिंग होम में एडमिट अभास कसौधन व उसके साथ मौजूद उसकी दादी।
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नोटबंदी के बाद से तमाम ऐसे परिवार हैं, जिनके मुखिया या परिवार का सदस्य बीमारी से पीड़ित होकर अस्तपताल में भर्ती है, मगर उनके पास कैश नहीं है। इनमें तमाम गरीब परिवार के लोग बगैर एटीएम कार्ड की सुविधा वाले भी हैं। ऐसे में इलाज को लेकर अस्पताल व मेडिकल स्टोर पर मारे-मारे फिर रहे हैं। हालात यह हैं कि लखनऊ रेफर करने पर तीमारदार मरीज को नहीं ले जा पा रहे हैं।
जिले का आलम यह है कि निजी नर्सिंगहोम बगैर धन के इलाज नहीं कर रहे हैं और घरवालों को धन के लिए बैंक में लाइन लगा रहे हैं। अस्पतालों में कैशलेस दवा व फीस आदि लेने का कहीं कोई इंतजाम नहीं है। हर हाल में उनको नकदी चाहिए।
आठ नवंबर को प्रधानमंत्री ने एक हजार और पांच सौ की नोटबंदी की घोषणा की। लोग अपने घरों का धन बैंकों में जमा करने के लगे, लेकिन बैंकों से पर्याप्त मात्रा में धन नहीं मिल रहा है। नोटबंदी के बाद लोगाें के खाते में धन होने के बावजूद पैसे के लिए इधर उधर भटक रहे हैं।
सबसे अधिक उन परिवार के लोगों को दिक्कतें आ रही हैं, जिस परिवार में किसी की तबीयत खराब हो गई, उस परिवार के लोग एक व्यक्ति मरीज को लेकर अस्पताल में तो दूसरा रुपए के लिए एटीएम की लाइन में लगा हुआ है।