पिछले एक वर्ष से सक्रिय लोग ज्वॉइंट वेंचर बना होटल का नक्शा विकास प्राधिकरण में जमा कर चुके हैं, भवन की ऐतिहासिकता और हेरिटेज गुलाबबाड़ी से सन्निकटता को नजरअंदाज कर प्राधिकरण होटल स्वीकृत करने में जुटा है। जबकि पुरातत्व विभाग इसे लेकर पहले ही जिलाधिकारी तक से शिकायत दर्ज करा चुका है।
जिस घर में कभी समाजवादी विचारधारा की तेज लौ जली थी, जिसकी रोशनी देश की सीमाओं से पार होते हुए वैश्विक क्षितिज को आलोकित की थी, वहां अब होटल बनेगा। समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोग अब भी इसे समाजवादियों के प्रेरणाश्रोत के रूप में आनंद भवन की तर्ज पर विकसित करने के पक्षधर हैं।
ताकि देश व समाज को आचार्य के विचारों से लाभ हो। आचार्य नरेंद्र देव की पैदाइश भूमि सीतापुर है, लेकिन जन्म के दो वर्ष बाद ही उनके पिता बलदेवदास फैजाबाद चले आए। संस्कृत के विद्वान माधव मिश्र ने नरेंद्र देव नाम दिया था, जबकिइनका मूल नाम अविनाशी लाल था।
रीडगंज स्थित पैतृक भवन का नाम बलदेव निवास है, लेकिन यह इमारत आचार्य नरेंद्र देव की कोठी के रूप में मशहूर है। समय की शिला पर न जाने कितनी मशहूर हस्तियों का हस्ताक्षर इस कोठी पर है। राजनीति के दिग्गजों से लेकर आध्यात्मिक जगत की विभूतियों का आना-जाना इस इमारत में रहा।
भारत के समाजवादी आंदोलन में डॉ. राम मनोहर लोहिया की पंचमढ़ी थीसिस मशहूर है तो आचार्य नरेंद्र देव की गया थीसिस, लेकिन देश का दुर्भाग्य है कि पंचमढ़ी थीसिस देने वाले डॉ. लोहिया को उनके अकबरपुर में ही बिसार दिया गया, जबकि गया थीसिस देने वाले आचार्य की धरोहर को बाजार की शक्तियां होटल बनाने को बेताब हैं।
गांधी और नेहरू आ चुके हैं कोठी में
आजादी के दौर में कोठी से आंदोलन की रणनीति बनाई जाती थी। यहां पर महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू आ चुके हैं। प्रयाग के आनंद भवन की तरह तत्समय की सियासी हस्तियों का यह महत्वपूर्ण ठौर था। डॉ. लोहिया, जेबी कृपालानी और सुचेता कृपलानी का भी इस कोठी से गहरा रिश्ता रहा। आध्यात्मिक जगत की विभूतियां भी यहां ठौर बना चुकी है।
नौ लोग जो बनाना चाह रहे होटल
विकास प्राधिकरण में नक्शे की स्वीकृति के लिए, जो रिकॉर्ड पेश किए गए हैं, उसके मुताबिक इसका नक्शा संख्या 416/2015 है। राजस्व संख्या 2771, 2878 है तथा नजूल भूमि नंबर 1525, 1526, 1527 व 1532 है। चक नंबर सात है तथा भवन संख्या 5/17/3/2, 5/17/3/1, 5/17/3/3, 5/17/3/4, 5/6/14 और 5/16/5 है। इसमें 5/17/3/3 नया है। यह सभी राजस्व अभिलेख में रमना चाणक्यपुरी में है।
वल्लभ भाई पटेल के पुत्र विनोद कुमार पटेल, विनय कुमार पटेल और मुकेश पटेल तथा नैना. वी. पटेल पत्नी विनोद, अंजू. एम. पटेल पत्नी मुकेश, ज्ञान प्रकाश पुत्र हरीशलाल, इंद्र कुमार पुत्र स्व. बलदेव प्रसाद, वर्षा पत्नी ज्ञान प्रकाश और आरती पत्नी इंद्र कुमार ने प्राधिकरण के पास होटल बनाने के लिए नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन किया है। इसी क्रम में बीती 28 अगस्त को मानचित्र प्रभारी ने एक माह के भीतर आपत्ति एवं सुझाव मांगा है।
यहां नहीं हो सकता नया निर्माण
आचार्य नरेंद्रदेव के जिस भवन को होटल बनाने की बात हो रही है, वह हैरिटेज बिल्डिंग गुलाबबाड़ी से सटी है। यहां कोई नया निर्माण नहीं हो सकता। हमने डीएम को अवगत कराते हुए नोटिस भी जारी कर रखी है।
-डीके जायसवाल, पुरातत्व संरक्षा सहायक अधिकारी
नहीं दी जा सकती होटल बनाने की इजाजत
नक्शा स्वीकृति के लिए आवेदन संज्ञान में हैं, लेकिन जिस तरीके की हेरिटेज परिस्थितियां हैं, उस स्थिति में होटल बनाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। एई व जेई सर्वें करते हैं, अगर उनकी सर्वे रिपोर्ट में किसी भी स्तर पर तथ्य छिपाने जैसी बात होगी, तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
-राजेश कुमार, उपाध्यक्ष, अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण