अयोध्या। रामनगरी में ब्रह्म मुहूर्त में हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंतलाल को अबीर-गुलाल अर्पित कर होली की शुरूआत हुई। इसके बाद रामजन्मभूमि में जमकर अबीर-गुलाल उड़ा। गीत-संगीत की महफिल भी सजी। संत-धर्माचार्यों व भक्तों ने अपने आराध्य संग होली खेली।
मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि होली पर श्रीरामलला को केसरिया रंग का नवीन वस्त्र धारण कराया गया। पूड़़ी, कचौड़ी, खीर, पेड़ा, गुझिया आदि पकवानों का भोग लगाकर अबीर गुलाल अर्पित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम की कड़ी में रामलला को फगुआ भी सुनाया गया।
संत एमबी दास ने राम रसिया रंग लगाने दो, राम रसिया..., सरयू त कुंज मची होरी, एक दिशि राम सखन संग राजत सकल सखी सिया ओरी..., रंग डारो न मोपै धनुधारी लाल, जो मोरी सारी पै रग परैगी तो मैं देहौं गारी लाल...। जैसे होली के पदों को सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया। राममंदिर निर्माण कार्य में लगे इंजीनियरों व कारीगरों ने भी रामलला को अबीर-गुलाल अर्पित किया।
हनुमानगढ़ी में होली का हुलास चरम पर दिखा। नागा-साधुओं ने आराध्य हनुमंतलला के विग्रह के समक्ष जमकर अबीर-गुलाल उड़ाया, नृत्य भी किया। नागा-साधुओं की टोली ने मठ-मंदिरों में जाकर भगवान के विग्रह को अबीर-गुुलाल अर्पित कर होली खेली। कनक भवन में सांस्कृतिक कलाकारों ने होली के पदों का गायन किया। भक्तों ने आराध्य के समक्ष फगुआ गीतों पर जमकर नृत्य किया।
इसी तरह लक्ष्मण किला में भी होली पर केंद्रित गीतों की प्रस्तुति ने समां बांध दिया। यहां फूलों की होली खोली गई। दशरथ महल बड़ास्थान में भी फूलों की होली खेली गई। लोक कलाकारों ने गीत-संगीत की प्रस्तुति देकर होली के उत्सव में चार-चांद लगा दिया।