सात दिवसीय द्वादश वर्षीय नागापनी महोत्सव में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की धूम है। कड़ी सुरक्षा के बीच शनिवार के फाल्गुनी एकादशी पर्व पर हनुमानगढ़ी से गाजे-बाजे के साथ नागा साधुओं ने रंगभरी एकादशी का जुलूस निकाला।
पुजारियों ने मंदिर के गर्भगृह में हनुमंतलला को अबीर-गुलाल अर्पित की। उसके पश्चात मंदिर के पवित्र निशान व छड़ी के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते निकली साधुओं की टोली ने पंचकोसी परिक्रमा की।
अखिल भारतीय श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़े का नागापनी महोत्सव में अखाड़ों की परंपरा व संस्कृति का वैभव दिखने लगा है। अखाड़े के पवित्र चरण पादुका स्थल चरण पादुका का षोडशोपचार पूजन-अर्चन किया जा रहा है।
एकादशी तिथि पर मंदिर में सुबह साढ़े नौ बजे पवित्र निशान व छड़ी की विधिपूर्वक पूजन-अर्चन किया गया। विराजमान हनुमंत लला को अबीर-गुलाल अर्पित कर गाजे-बाजे के साथ साधुओं की टोली ने एक दूसरे को रंगों में सराबोर कर रंगभरी एकादशी जुलूस निकाला।
नागा साधु अस्त्र-शस्त्रों से करतब करते और अबीर-गुलाल उड़ाते सरयू तट पहुंचे। यहां पर पूजन-अर्चन कर जुलूस ने धर्मनगरी की पंचकोसी परिक्रमा की। परिक्रमा के दौरान रास्ते में छोटी छावनी, हनुमानबाग, लंबे हनुमान, भक्तमाल आदि स्थलों पर संतों व श्रद्धालुओं ने जगह-जगह स्वागत व अभिनंदन किया।
जुलूस में पुजारी रमेश दास, राजू दास, अतुल दास, नवीन दास, भानू दास, रविशंकर दास, उमाशंकर दास, कल्याण दास, लवकुश दास, अजीत दास, मेघनाद दास, राम सुंदर दास, विवेक पहलवान, प्रेमदास पहलवान, अंजनी कोतवाल आदि शामिल रहे। सुरक्षा के मद्देनजर जुलूस में पुलिस व पीएसी के सुरक्षाकर्मी बड़ी संख्या में साथ-साथ रहे।