अयोध्या। आरति कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की, इस उच्चारण के साथ ही आधी रात को समूची रामनगरी बजरंगबली के जयकारों से सराबोर हो गई। घंटे-घड़ियाल की गूंज व पटाखों के धमाकों के बीच बजरंग बली के जन्म का उल्लास मठ-मंदिरों से लेकर सड़कों पर उत्साह के रूप में दिखा। जयंती पर्व पर बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी आस्था का केंद्र रही। पूर्व संध्या से ही शुरू हुए उत्सव का सिलसिला जन्म का मुहूर्त करीब आने के साथ ही शिखर की ओर बढ़ता गया। हनुमान जयंती का मौका होने के कारण यहां भोर से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा। मंदिर के जगमोहन सहित सीढ़ियां और प्रांगण का कोना-कोना श्रद्धालुओं से पटता चला गया। संध्या और शयन आरती के नित्य नियम के दौरान श्रद्धालुओं ने आस्था के ज्वार में डुबकी लगाई, पर वे इतने से तृप्त नहीं रहे। हनुमंतलाल के जन्मोत्सव की प्रतीक्षा में हजारों श्रद्धालु देर रात तक उनके दरबार में डटे रहे। मंदिर में जयंती पर हनुमंतलला जी का दूध, दही, सरयू जल व इत्र आदि से अभिषेक किया गया। अंजनीनंदन के जन्मोत्सव की रस्म पूरी की गई। हनुमान जी के पसंदीदा फूल गेंदा की बहुतायत के बीच भांति-भांति के फूलों की झांकी से मंदिर का प्रांगण आच्छादित किए जाने के साथ समृद्धि और सौंदर्य की बानगी स्वरूप हनुमान जी को भी स्वर्णाभूषणों से पूरे समर्पण के साथ सजाया गया था। ठीक 12 बजे पट खुले और दर्शनार्थी श्रद्धा के अतिरेक और बजरंगबली के वैभव में जैसे खो से गए। करीब 15 मिनट तक चली आरती के दौरान दर्शक मंत्र मुग्ध होकर आस्था में डूबे रहे। वहीं, नगरी के अन्य मंदिरों में भी भक्त शिरोमणि हनुमान जी के प्रति अनुराग की धुन गूंजी। कनक भवन, श्रीकालेराम मंदिर, हनुमत सदन, हनुमत निवास, हनुमान बाग, जानकी महल ट्रस्ट, पंचमुखी हनुमान मदिर, हनुमान गुफा, श्रीराम बल्लभाकुंज, बड़े हनुमान, वीर भगवान आदि मंदिरों में हनुमंत लला का जन्मोत्सव उत्सव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मंदिरों में आराध्य के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही।