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फैजाबाद में एक भी निर्दलीय प्रत्याशी नहीं

Fri, 25 Apr 2014 05:30 AM IST
Faizabad
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फैजाबाद। लोकसभा चुनाव में इस बार फैजाबाद संसदीय क्षेत्र में एक और रिकार्ड टूट गया। अबकी पहला मौका है जब चुनाव मैदान में एक भी निर्दल प्रत्याशी नहीं है। अतीत के सभी चुनाव में कई-कई निर्दल प्रत्याशी चुनाव को रोचक बनाते रहे हैं। ऐसे भी चुनाव हुए हैं जिसमें 15 में से 10 प्रत्याशी निर्दल रहे हैं। रिकार्ड तो यह भी बन गया कि लोकसभा चुनाव में पहली बार एक साथ 10 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र खारिज हुए। ऐसा अब तक के चुनाव में शायद कभी नहीं हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव में रिकार्ड टूटने के साथ बना भी। एक ही दिन में 10 प्रत्याशियों के नामांकन पत्र खारिज होने का रिकार्ड बना तो हर बार के लोकसभा चुनाव में निर्दल प्रत्याशी के मौजूदगी का रिकार्ड टूट गया। इस बार चुनाव मैदान में इस संसदीय सीट पर कोई भी निर्दल प्रत्याशी नहीं रह गया है। पिछले सन् 1980 तक के चुनाव के आंकड़े बताते हैं कि कोई भी ऐसा लोकसभा चुनाव नहीं रहा है, जिसमें निर्दल प्रत्याशी यहां चुनाव के मैदान में न रहा हो। हाल यह रहा है कि लोकसभा चुनाव में एकाध बार तो प्रत्याशियों की संख्या में दो तिहाई प्रत्याशी निर्दल के रूप में ही चुनाव मैदान में उतरे थे। ऐसा वाकया सन् 1984 के चुनाव में हुआ था जब चुनाव लड़ने वाले 15 में से 10 प्रत्याशी निर्दलीय थे। यह अलग बात है कि पिछले कई दशक में तो इस सीट से कोई भी निर्दल प्रत्याशी लोकसभा का चुनाव नहीं जीता लेकिन चुनाव के मैदान में इनकी धमक रही है। इस बार का चुनाव अपवाद हो गया है। प्रत्याशियों की संख्या तो 11 है लेकिन निर्दल प्रत्याशी एक भी नहीं है।
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इस बार चुनाव में एक और रिकार्ड बन गया। लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने वालों में से 10 प्रत्याशियों के पर्चे खारिज होना कम से कम इस संसदीय सीट के लिए रिकार्ड है। इससे पहले यहां से नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों में से कभी 10 नामांकन खारिज नहीं हुए थे। इस बार यहां से नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशियों की संख्या 21 रही। नामांकन पत्रों की जांच में एक मुश्त 10 प्रत्याशियों का नामांकन खामियों के चलते खारिज कर दिया गया। कारण चाहे कुछ भी रहा हो लेकिन इसी के साथ नामांकन दाखिल करने वाले सभी निर्दल प्रत्याशी चुनाव मैदान से बाहर हो गए। चुनाव के जानकार भी इसकी पुष्टि करते हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के रुझान से अभी और भी रिकार्ड बनने के आसार हैं।
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