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वोटरों का मिजाज समझना दिग्गजों की चुनौती

Thu, 17 Apr 2014 05:30 AM IST
Faizabad
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फैजाबाद। वोटरों का मिजाज समझना सियासी दलों व नेताओं की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या से उपजी सहानुभूति लहर में पहली बार निर्मल खत्री सांसद बने थे। बाद में बोफोर्स व मंडल-कमंडल की बयार में साफ हुई कांग्रेस को खाता खोलने में दो दशक लगे। 2009 में जाति-धर्म के मुद्दे पर मनरेगा व कर्जमाफी का पिटारा लेकर निर्मल खत्री की वापसी हुई थी। मगर 2012 के विस चुनाव में वोटरों के बदले मुद्दे व मिजाज से कांग्रेस को फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र की सभी पांचों विधानसभाओं में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले कुल वोट चार विस सीट जीतने वाली सपा के मुकाबले एक लाख 92 हजार 252 कम थे। इस बार भी कांग्रेस, भाजपा, सपा व बसपा के घोषणापत्र में विकास का मुद्दा ही सर्वोपरि है, लेकिन जीत के आंकड़े तक वोटर किस करवट जाएंगे, सही अनुमान चुनौती बना हुआ है।
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फैजाबाद सीट 1952 से कांग्रेस का गढ़ रही है। लेकिन यहां के वोटर बदलती लहर व मुद्दों पर सियासत का रुख मोड़ते रहे हैं। इमरजेंसी के खिलाफ बनीं परिवर्तन लहर में 1977 का चुनाव बीएलडी के अनंतराम जायसवाल ने एक लाख 47 हजार मतों के अंतर से जीता था। बाद में जनता पार्टी का हश्र देख 1980 में मतदाताओं का मिजाज बदला और कांग्रेस के जयराम वर्मा सांसद बने। इसी बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी ने कमान संभाली और 1984 के चुनाव में उपजी सहानुभूति लहर में पहली बार निर्मल खत्री सांसद बने। लेकिन बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के मुद्दे पर बीपी सिंह ने ऐसी लहर बनाई कि 1989 में जनतादल गठबंधन से भाकपा के खाते में गई यह सीट मित्रसेन यादव ने जीती। अगले चुनाव में मंडल-कमंडल की राजनीति में अयोध्या मंदिर मुद्दे पर गरमाई रामलहर ने 1991 से आंदोलन के अगुवा रहे विनय कटियार लगातार दो बार सांसद बने। 1998 में उनकी हैट्रिक को दलबदल कर सपा में आए मित्रसेन ने ही रोका।
1999 में फिर विनय कटियार सांसद चुने गए। मगर 2004 में बसपाई हुए मित्रसेन जीते, तब उनके सामने भाजपा ने प्रत्याशी बदलकर लल्लू सिंह को खड़ा किया था। 2009 के चुनाव में कांग्रेस से निर्मल खत्री ने दो दशक बाद वापसी की, तब जाति व धर्म की राजनीति पर मनरेगा व कर्जमाफी का मुद्दा सिर चढ़कर बोल रहा था। लेकिन इसकी गूंज 2012 के विस चुनाव में मंद पड़ गई। लोकसभा चुनाव में निर्मल खत्री ने 2 लाख 11 हजार 243 मत पाकर सपा के मित्रसेन को 53 हजार 928 मतों से हराया और चार विस सीटें बीकापुर, मिल्कीपुर, रुदौली और दरियाबाद में अव्वल रहे। जबकि विस चुनाव में कांग्रेस को पांचों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, वह तब जब निर्मल खत्री के पास प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कमान थी, और टिकटों के वितरण में उनकी ही चली। बीकापुर से रालोद व कांग्रेस के संयुक्त प्रत्याशी मुन्ना सिंह चौहान तीसरे स्थान पर रहे। फैजाबाद लोस की पांच सीटों में सपा से अयोध्या सीट से तेज नरायण पांडेय, बीकापुर सीट मित्रसेन, मिल्कीपुर से अवधेश प्रसाद व दरियाबाद सीट राजीव कुमार जीतकर विधायक हैं, जबकि रुदौली की एक सीट भाजपा के रामचंद्र यादव ने जीती है।
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