फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नहीं बंटी साड़ी-कंबल, 8 करोड़ सरेंडर

Tue, 01 Apr 2014 05:30 AM IST
Faizabad
विज्ञापन
विज्ञापन
फैजाबाद। जिले में इस वित्तीय वर्ष भी कई जनोपयोगी योजनाएं कागजों से उतर कर जमीन में नहीं आ सकी। खाद्य विभाग ने एक अरब तो स्वास्थ्य विभाग के पूल में कई करोड़ रुपये वापस कर दिए गए। वहीं प्रदेश सरकार की साड़ी-कंबल वितरण भी नहीं शुरू हो पाने के चलते पंचायत ने आठ करोड़ रुपये सरेंडर कर दिया। वित्त विभाग की नई व्यवस्था और आचार संहिता का असर भी वित्तीय साल के समापन पर पड़ा। विभागों में पहले जैसी न काम निपटाने की आपाधापी थी, न आखिरी दिनों में धन खर्च कर काम निपटाने की पुरानी परंपरा। इस बार 25 मार्च तक ही सभी कार्यों के बिल-बाउचर की रिपोर्ट कोषागार तक देनी थी और कोषागार से 31 मार्च को ऑन लाइन बजट खर्च की फीडिंग करनी थी। इसके चलते सोमवार शाम होते-होते कोषागार में सन्नाटा पसर गया। पहले की तरह इस वित्तीय साल के अंतिम दिन बजट को लेकर अफरातफरी का माहौल नहीं रहा। कोषागार में भी दूसरी बेला तीन बजते-बजते सन्नाटा पसर गया। इसका कारण रहा वित्त विभाग की ई-फाइनेंस की व्यवस्था और जिले में आचार संहिता का प्रभाव। न तो नई परियोजनाएं स्वीकृत हुई और न ही शासन से उनके धन का आवंटन वित्तीय साल के अंतिम दिन होना था। वित्त विभाग की नई व्यवस्था के तहत इस बार विभागों के बिल कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि 25 मार्च रखी गई थी। इसके तहत सभी विभागों के बिल दाखिल कर दिए गए। 31 मार्च को तो केवल समायोजन के कार्य ही शेष रह गए थे। जिले में ज्यादा धन खर्च करने वाले लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण अभियंत्रण सेवा जैसे विभागों ने आवंटित पूरी की पूरी धनराशि का उपभोग कर लिया। इसी तरह मनरेगा, इंदिरा आवास, लोहिया आवास सहित तमाम विभागों ने भी पैसे का उपभोग कर लिया। चल रही योजनाओं में लाभार्थियों की दूसरी किश्त की रकम खातों में ट्रांसफर करने से भी यह स्थिति बनी। खास बात यह रही कि पांच मार्च से ही चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण नए आवंटन नहीं हुए तो इसके लिए धन का आवंटन न होने से पहले से आवंटित धन खर्च करने की होड़ रही। परिणाम रहा कि ज्यादातर विभागों ने खातों को ड्राई कर दिया।
विज्ञापन


इनसेट..
स्वास्थ्य विभाग धन नहीं खर्च कर पाया
- स्वास्थ्य विभाग धन नहीं खर्च कर पाया। प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरसीएच फ्लैक्सीपूल) में लगभग 1.50 करोड़ डाले गए तो एनआरएचएम के मिशन फ्लैक्सी पूल में भी लगभग 7.50 करोड़ रुपये डाले जाने की खबर है।
साड़ी-कंबल का 8 करोड़ भी सरेंडर
- प्रदेश सरकार ने साड़ी कंबल के मद में जिले के लिए कुल लगभग आठ करोड़ का आवंटन किया था लेकिन बीच में यह योजना ठहर सी गई तो वित्तीय साल की समाप्ति पर यह धनराशि शासन को समर्पित कर दी गई। डीपीआरओ एरके सिंह ने भी इसकी पुष्टि की है।
विज्ञापन


पीडब्ल्यू ने खर्च किया 30 करोड़
- लोक निर्माण विभाग के निर्माण खंड-दो को सड़कों के निर्माण मद में मिले 20 करोड़ रुपये को खर्च कर डाला। अधिशासी अभियंता बीएन ओझा बताते हैं कि इस वर्ष कोई धनराशि समर्पित नहीं की गई है। साल 2012-13 इस खंड से लगभग सवा करोड़ रुपये लौटाए गए थे। प्रांतीय खंड-एक ने भी इस वर्ष बजट नहीं सरेंडर किया। उसने वर्ष में 30 करोड़ रुपये खर्च किया। एक्सईएन एके सिंह ने बताया कि इस साल कोई बजट समर्पित नहीं किया गया।
खाद्य विभाग ने लौटाया एक अरब
- खाद्य विभाग ने करीब एक अरब रुपये शासन को लौटा दिया। यह धन अनाज खरीद के लिए आए बजट में से यह धनराशि समर्पित की गई। इस साल अपेक्षित मात्रा में गेहूं व धान खरीद न हो पाने के कारण इसे वापस करना पड़ा। वरिष्ठ संभागीय लेखाधिकारी राधेश्याम वर्मा ने बताया कि अनाज खरीदारी के मद के 92 करोड़ 96 लाख रुपये और विविध मद का साढ़े 24 हजार रुपये समर्पित किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें