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वेदांती व कमलनयन को लौटाया

Tue, 24 Sep 2013 05:37 AM IST
Faizabad
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अयोध्या (फैजाबाद)। कारसेवकपुरम् यज्ञशाला में पूजन-आरती के बाद सोमवार को सुबह आठ बजे संतों ने पंचकोसी परिक्रमा निकाली। जैसे ही विहिप नेता व पूर्व सांसद डॉ. विलासदास वेदांती और श्रीरामजन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास आगे बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोक दिया। समर्थकों से गो सेवा से जुड़ा एक बैनर भी कोतवाल ने छीन लिया, लेकिन विहिप नेताओं ने जबरदस्ती जाने के बजाय लौटना ही मुनासिब समझा। प्रशासन ने सिर्फ दक्षिण के कुल 35 संतों व साधक महिलाओं को पंचकोसी परिक्रमा की इजाजत दी, जो दोपहर 12:30 बजे लौटे। डीएम वीके द्विवेदी ने दो टूक कहा कि शांति से परिक्रमा करने पर प्रशासन को कोई एतराज नहीं होगा।
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कोटिलिंग महाशैवक्षेत्र के पीठाधीश्वर बिरूदांकित शिवस्वामी के नेतृत्व में सोमवार को कारसेवकपुरम् से स्वामी आनंद सरस्वती ज्ञानेश्वरानंद, माता ज्ञानेश्वरी आदि करीब 36 संतों व महिला साधकों का जत्था भोर में सरयू तट पहुंचा। स्नान-पूजन के बाद यज्ञशाला लौटकर पूजन-आरती के बाद ठीक आठ बजे पंचकोसी परिक्रमा के लिए आगे बढ़ा। यज्ञशाला से बाहर आते ही एसएसबी के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया, जबकि बाहर गेट पर एसपी सिटी रामसेवक गौतम, रेजीडेंट मजिस्ट्रेट अवधेश मिश्र, सीओ अयोध्या तारकेश्वर पांडेय भारी फोर्स के साथ सतर्क हो गए। जैसे ही साधु-संत कारसेवकपुरम् का गेट पार कर सड़क पर आगे बढ़ने लगे, अचानक सीओ ने आगे बढ़कर पूर्व सांसद डॉ. विलासदास वेदांती और महंत कमलनयन दास को रोक दिया।
कहा कि विहिप के लोगों के लिए परिक्रमा प्रतिबंधित है, इसी बीच पीछे एक बैनर लहराने की कोशिश से पहले ही कोतवाल अयोध्या निर्मल दूबे ने विहिप कार्यकर्ताओं से छीन लिया। एकबारगी तो टकराव को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया है, मगर विहिप के संयुक्त महामंत्री वाई राघव लू ने वेदांती और कमलनयन दास को यात्रा से पृथक कर लिया, तब प्रशासन ने दक्षिण की 14 महिला साधुओं समेत 35 लोगों को आगे परिक्रमा की इजाजत दी। सुरक्षा के लिए 15 किमी के मार्ग में साथ-साथ एसएसबी की एक कंपनी पैदल चल रही थी। जबकि दो जोन, पांच सेक्टर व 10 सब सेक्टर में सीआरपीएफ, रैफ, एसएसबी समेत पीएसी की कुल 10 कंपनी जवान तैनात रहे।
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एसएसपी केबी सिंह ने कहा कि परिक्रमा मार्ग में एक महिला साधक के बेहोश होने के अलावा कहीं कोई घटना नहीं घटी। साधु-संतों ने अपने-अपने संकल्पों के साथ विधि विधान से परिक्रमा की। कारसेवकपुरम् से बरामद बैनर पर भी गो सेवा को लेकर स्लोगन लिखे हुए थे। प्रशासन ने खास उद्देश्य के लिए विहिप की पंचकोसी परिक्रमा पूरी तरह प्रतिबंधित रखा।
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