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गोदाम में भरपूर, पर सहकारी समितियों से दूर

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Faizabad
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फैजाबाद। प्रादेशिक को-आपरेटिव फेडरेशन (पीसीएफ) के गोदाम उर्वरकों से भरे पड़े हैं, फिर भी ये साधन सहकारी समितियों से दूर हैं। गेहूं बुआई शुरू हो गई है। किसानों को उर्वरकों की सख्त जरूरत भी है। गेहूं बुआई के समय खेतों में उर्वरक डालने के लिए किसान उसकी तलाश कर रहा है, लेकिन समितियों के गोदाम खाली पड़े हैं। वजह, सहकारी समितियों तक उर्वरक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने वाला पीसीएफ किसानों की जरूरत के प्रति संवेदनशील नहीं है। समय रहते समितियों पर उर्वरक नहीं पहुंचाए जा रहे। नतीजतन, किसानों को गेहूं बुआई के लिए खाद ढूढ़नी पड़ रही है। यह हाल तब है कि जब जिलाधिकारी ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए समय से उर्वरक पहुंचाने का निर्देश पीसीएफ अधिकारियों को दिया था। मालूम हो कि निजी व सहकारी क्षेत्र की उर्वरक निर्माता कंपनियों के उर्वरकों को डिमांड के अनुरूप साधन सहकारी समितियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी पीसीएफ पर है। समितियों के सचिव की ओर से उर्वरक डिमांड और धन पीसीएफ को दिए जाने के उपरांत संस्था अपनी ओर से परिवहन की व्यवस्था कर समितियों तक उर्वरक पहुंचाती है। सूत्रों का कहना है कि चालू रबी सीजन में समितियों के सचिवों की ओर से डिमांड पीसीएफ को भेजी गई है। तकरीबन सभी डिमांड के सापेक्ष चेक भी पीसीएफ को मिल गया है, बावजूद इसके संस्था की ओर से उर्वरक नहीं भिजवाया गया है। यही वजह है कि कहीं किसी समिति पर डीएपी है, तो यूरिया का अकाल है। कहीं यूरिया व एनपीके से गोदाम भरा है, तो डीएपी नहीं है। जबकि पीसीएफ के गोदाम में सभी प्रकार के उर्वरक भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं। ऐसा परिवहन की लचर व्यवस्था और जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते हो रहा। बीते दिनों कलक्ट्रेट में आयोजित इफको के एक कार्यक्रम में यह बात उठी थी, तो तत्कालीन जिलाधिकारी दीपक अग्रवाल ने पीसीएफ को निर्देशित करते हुए प्रतिदिन 35-40 गाड़ी उर्वरक प्रेषित करने को कहा था। जानकार बताते हैं कि इसके बाद कुछ दिन तक तो ठीक रहा, लेकिन उनके जाते ही व्यवस्था पुराने ढर्रे पर आ गई। अब हाल यह है कि प्रतिदिन ज्यादा से ज्यादा 10-15 गाड़ी ही भेजी जा रही। इसी वजह से समितियों पर उर्वरक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसी स्थिति मंडल के तकरीबन सभी जिलों में है। हालांकि पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक जगत नरायन इससे इंकार करते हैं। उनका कहना है कि डिमांड व चेक मिलने पर उर्वरक शीघ्रतिशीघ्र भिजवाया जा रहा है।
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