फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच माह बाद भी फरार बंदी पुलिस पकड़ से दूर

Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
Faizabad
विज्ञापन
विज्ञापन
फैजाबाद। मंडल कारागार से विचाराधीन बंदी की फरारी की घटना को लगभग पांच महीने से ज्यादा बीत गए। मगर कारागार पुलिस अभी तक बंदी का पता नहीं लगा सकी है। स्थिति यह है कि अब बंदी की तलाश और फाइल लगभग बंद हो चुकी है। कारागार प्रशासन को अब सिर्फ अपने मुखबिरों का सहारा है। उधर, इस मामले में लापरवाही के आरोपी बंदी रक्षकों के विरुद्ध भी अभी कार्रवाई नहीं हुई है।
विज्ञापन

महराजगंज थाना क्षेत्र के जजवट गांव का निवासी विचाराधीन बंदी देवराज यादव पुत्र अम्मा यादव मंडल कारागार से नौ जून को रहस्यमय ढंग से गायब हो गया था। उसे गोसाईंगंज क्षेत्र में हुई चोरी के मामले में बीती 25 फरवरी को जेल में निरुद्ध कराया गया था। इस मामले में प्रथम दृष्टया जिम्मेदार मिले दो बंदी रक्षकों अवधेश श्रीवास्तव व द्वारिका शुक्ल को दोषी मान जेल अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके अलावा दोनों बंदी रक्षकों के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था और विभागीय जांच की सिफारिश की गई थी। विभागीय जांच जेल अधीक्षक ने बाराबंकी के कारागार अधीक्षक लक्ष्मीनारायण दोहरे को सौंपी थी। बंदी की तलाश में पुलिस व कारागार की टीम ने कई संभावित ठिकानों पर दबिश दी। मगर कोई कामयाबी नहीं मिल सकी।

बोले अधिकारी
मंडल कारागार के जेलर कमलापति त्रिपाठी का कहना है कि काफी तलाश कराने के बाद भी फरार बंदी को कोई पता नहीं लग सका। अब मुखबिर अगर कोई सूचना देते हैं, तो कार्रवाई कराई जाएगी। उधर, बंदी रक्षकों के विरुद्ध अभी कोई कार्रवाई न होने के बाबत वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय कहते हैं कि बाराबंकी जेल अधीक्षक ने जांच पूरी कर ली है। उप महानिरीक्षक जेल ने कुछ साक्ष्य और आरोपी बंदी रक्षकों से उनकी सफाई मांगी थी। उनके जवाब भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा पांच अन्य बंदी रक्षकों के खिलाफ भी जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें