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रामलीला पर फिर छाया संकट, नहीं मिली फूटी कौड़ी

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रामलीला पर फिर छाया संकट, नहीं मिली फूटी कौड़ी
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मंचन कर रहीं मंडलियों को नहीं मिल सका पारिश्रमिक

नितिन कुमार मिश्र
अयोध्या। योगी सरकार बनने के बाद डेढ़ साल से बंद चल रही रामनगरी की अनवरत रामलीला तो शुरू हो गई, लेकिन इसके लिए शासन से अभी तक बजट नहीं मिला है। रामलीला का मंचन कर रहीं मंडलियों का पारिश्रमिक अधर में लटका है। जिसके चलते अनवरत रामलीला पर संकट के बादल एक बार पुन: मंडराने लगा है। अयोध्या शोध संस्थान किसी तरह रामलीला का मंचन करा रहा है।
संस्कृति विभाग की ओर से रामनगरी अयोध्या में अनवरत रामलीला का मंचन अयोध्या शोध संस्थान की ओर से बीते 13 साल से चल रहा है। 23 नवंबर 2015 की रात संस्थान के व्यवस्थापक अविनाश कुमार की मौत के बाद से रामलीला मंचन पर ब्रेक लग गया। इसकी वजह स्टाफ की कमी बताई गई, साथ ही अखिलेश सरकार की उदासीनता। मगर सूबे में योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते ही अनवरत रामलीला का मंचन प्रारंभ कराने की घोषणा की। जिसके बाद बीती तीन मई से पुन: लीला का मंचन शुरू हुआ, लेकिन अभी तक रामलीला के लिए शासन से फंड नहीं आया है, जबकि विधानसभा से पारित बजट में अनवरत रामलीला के लिए बजट की स्वीकृतियां दी जा चुकी हैं। हाल यह है कि कलाकारों का पारिश्रमिक भी अधर में लटका है।
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संस्थान के सूत्र बताते हैं कि मई से जुलाई तक तीन मंडलियां लीला का मंचन कर चुकी हैं। चौथे चरण में आदर्श बृजलोक कला भारती रामकृष्ण लीला मंडली अयोध्या में रामलीला का मंचन कर रही है। इनमें से एक लीला मंडली का भुगतान किसी तरह अयोध्या शोध संस्थान ने अपने मद से किया है, बाकी दो मंडली के कलाकारों का पारिश्रमिक अभी अधर में है। वहीं, लीला मंचन के दौरान जनरेटर, डीजल, फूल माला, साउंड सिस्टम आदि पर प्रतिदिन लगभग एक हजार रुपये का खर्च आता है। संस्थान के मद से तीन माह में लगभग 90 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब तक कोई भुगतान नहीं हुआ।
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