गन्ना सर्वे पर चीनी मिल ने खड़े किए हाथ
फैजाबाद। चीनी का मूल्य कम होने का हवाला देते हुए चीनी मिल ने गन्ना सर्वे से हाथ खींच लिया है। इस कारण गन्ना सर्वे एक माह पिछड़ गया है। अब गन्ना आयुक्त ने समितियों को सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं। समिति में स्टाफ व संसाधनों की कमी के चलते अधिकारियों को पसीना आ रहा है। सर्वे न होने से किसानों के फसल की वास्तविक जानकारी नहीं हो सकेगी, जिसकी वजह से पेराई सत्र में किसानों की दुश्वारियां बढना तय हैं।
जिले के किसानों का गन्ना क्रय करने के लिए केएम शुगर मिल्स लिमिटेड मोतीनगर व रौजागांव चीनी मिल संचालित हैं। बीते पेराई सत्र में गन्ना उत्पादन में अधिक इजाफा होने से दोनों चीनी मिलों ने रिकॉर्ड पेराई भी की। चीनी के दाम में गिरावट आने की वजह से चीनी मिलों ने गन्ना मूल्य भुगतान रोक दिया। किसान आर्थिक तंगी से तो जूझ ही रहे हैं अब आगामी पेराई सत्र को लेकर भी बखेड़ा खड़ा हो गया है। 01 मई से नए पेराई सत्र का आगाज होना था। इसकी पहली कड़ी कहे जाने वाले गन्ना सर्वेक्षण कार्य की रूपरेखा गन्ना समिति व चीनी मिल के संयुक्त तत्वावधान में तैयार की गई। जीपीएस सिस्टम से गन्ना सर्वेक्षण कार्य कराने के लिए समितिवार सर्वेक्षण टीम गठित की गई। मसौधा चीनी मिल क्षेत्र में इसके लिए कुल 38 टीम व रौजागांव चीनी मिल क्षेत्र में 33 टीम गठित की गई। जिसे प्रत्येक दशा में 25 जून तक पूर्ण करना था। जो अभी तक शुरू नहीं हो सका। चीनी मिलों के सर्वेक्षण कार्य से इंकार के बाद गन्ना आयुक्त ने समितियों को मैनुअल सर्वे कराने का निर्देश दिया, जिसके बाद विभागीय अधिकारियों को पसीना छूटने लगा।
दोनों चीनी मिल क्षेत्र में सहकारी गन्ना विकास समिति मसौधा, फैजाबाद व गनौली समिति में संसाधन, स्टाफ आदि का रोना है। अभी विभाग की ओर से मैनुअल सर्वे शुरू कराने के नाम पर फीता आदि का प्रबंध किया जा रहा है। मसौधा समिति में विभागीय कर्मी इक्का-दुक्का गांवों में सर्वे शुरू कराने की बात कह रहे हैं। लेकिन किसी भी दशा में सर्वे कार्य समय से पूरा किया जाना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। मैनुअल सर्वे में खेत में गन्ने का रकबा, प्लाट की दिशा आदि फीते से नापा जाएगा। जिसमें तमाम दिक्कतें भी आएंगी। वहीं पेराई सत्र में किसानों को पर्ची के लिए भी दर-दर भटकना पड़ेगा। मसौधा समिति के सचिव मुकेश कुमार पांडेय ने बताया कि मैनुअल सर्वे के लिए फीता आदि का प्रबंध किया जा रहा है। एकाध गांव में सर्वे शुरू हो गया है।
सर्वे न होने से पेराई सत्र में बढ़ेगी मारामारी
गन्ना सर्वे शुरू न होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें देखी जा रही हैं। अंजना के किसान दीनदयाल ने कहा कि यदि सर्वे नहीं होगा तो गन्ने की वास्तविक स्थिति नहीं पता चलेगी। ऐसे में पर्चियों की दिक्कत से जूझना पड़ेगा। कुढ़ा केशवपुर के किसान उमेशचंद्र कहते हैं कि सर्वे न होने से प्रजातिवार गन्ना आपूर्ति में भी दिक्कत आएगी। अरली के गन्ने को सामान्य व अस्वीकृत प्रजातियों में तौलना मजबूरी होगी। किसान बब्बन कहते हैं कि इस बार अधिक लाभ के चक्कर में गन्ना क्षेत्रफल बढ़ाया था, लेकिन ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पेराई सत्र में गन्ना बेंचने के लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
चीनी के दाम कम होने से चीनी मिलों ने सर्वे करने से इंकार कर दिया है। गन्ना आयुक्त के निर्देश पर मैनुअल सर्वेक्षण की शुरुआत की जा रही है। किसान के हित को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है। -एपी सिंह, जिला गन्ना अधिकारी फैजाबाद