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अयोध्या होगा राममंदिर विवाद की सुप्रीम मध्यस्थता का केंद्र

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अयोध्या विवाद :
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अयोध्या होगी राममंदिर विवाद की सुप्रीम मध्यस्थता का केंद्र
अयोध्या। राम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद भूमि विवाद के सर्वमान्य समाधान के लिये अयोध्या सुप्रीम मध्यस्थता का केंद्र बनने जा रहा है। मामले को मध्यस्थता पैनल को सौंपने के बारे में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया है। पक्षकार निर्मोही अखाड़ा, महंत धर्मदास व हाजी महबूब मध्यस्थता के पक्ष में है, मगर इकबाल अंसारी पैनल पर सवाल उठाया है। विराजमान रामलला के पक्षकार सखा रामलला त्रिलोकीनाथ पांडेय ने मध्यस्थता को व्यर्थ की कवायद ठहराया है।

वैसे दशकों से हुई तमाम सुलह-समझौते की कोशिशें नाकाम साबित होती रही हैं। श्रीश्री रविशंकर भी यहां 2017 में ठीक दिवाली से पहले आकर निर्मोही अखाड़ा को छोड़ अन्य सभी पक्षों के असहयोग से निराश हुए थे। गौरतलब है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वर्ष 2010 के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 याचिकाएं दायर हुई हैं। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या में 2.77 एकड़ की विवादित भूमि तीनों पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर बांट दी जाए।
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अब सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने शुक्रवार को अपने आदेश में साफ कर दिया है कि अयोध्या विवाद में मध्यस्थता होगी। मध्यस्थता प्रक्रिया अयोध्या (फैजाबाद) में आयोजित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता जस्टिस एफएम कलीफुल्लाह करेंगे और इसमें श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू भी शामिल होंगे। हालांकि मध्यस्थता पैनल को लेकर यहां पक्षकारों व संत-धर्माचार्यों ने सवाल उठाए हैं।

पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। पैनल और श्री श्री रविशंकर का स्वागत करते हैं। समझौता दोनों पक्षों की कुर्बानी से होता है। भूमि विवाद 2.77 एकड़ का है ये विवाद निपट जाएगा तो 67 एकड़ भूमि का मामला भी सुलझ जाएगा। विहिप मामले को जिंदा रखना चाहती है, इसलिए विरोध कर रही है। सभी पक्ष एक साथ बैठेंगे नए सिरे से बात होगी तो उम्मीद है कि रामलला का मंदिर बनाने का रास्ता निकल आएगा।

पक्षकार महंत धर्मदास ने कोर्ट द्वारा बनाए गए पैनल का स्वागत किया है। कहा कि कोर्ट ने अबकी बार एक गंभीर पहल की है। पहल करने वाले अपनी रिपोर्ट कोर्ट में देंगे, कोर्ट जो फैसला सुनाएगी मानेंगे। कहा कि विहिप कोई पार्टी नहीं है। जो लोग आ रहे हैं वह कोर्ट के आदेश से आ रहे हैं और अधिकृत हैं। सुलह-समझौते का फार्मूला तैयार है, हनुमान जी की कृपा से सब ठीक होगा। जहां रामलला विराजमान हैं वहां पूजा पाठ हो रहा है, व्यवस्था चल रही है। हम लोग मिलकर मंदिर बनाएंगे।

मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने एक पैनल बनाया। अब उम्मीद है कि मामला हल हो जाएगा। पैनल में शामिल श्री श्री रविशंकर एक सुलझे हुए इंसान हैं। अन्य संत-महंतों की तुलना में वे ठीक हैं। रविशंकर क्या फार्मूला लेकर आएंगे अभी पता नहीं है, अब नए सिरे से वार्ता होगी। पैनल पक्षकारों से ही बात करेगा यह ठीक है। हमने हमेशा चाहा है कि मसला हल जाए, ताकि अमन चैन बना रहे। अब अधिकृत लोगों को कोर्ट ने चुना है, समाधान हो सकता है।

विराजमान रामलला की ओर से बतौर सखा रामलला पक्षकार त्रिलोकीनाथ पांडेय ने कहा कि कोर्ट जनभावनाओं के अनुसार चलती है, सबरीमाला केस इसका उदाहरण है। विवादित भूमि पर बाबरी मस्जिद नहीं थी, बल्कि मुस्लिम पक्ष का विजय स्तंभ था। जो अपमान का सूचक था, कलंक था। मस्जिद रामनगरी में बने यह कभी स्वीकार नहीं कर सकते हैं। कहा कि जो पैनल बना है इसकी क्या गारंटी है कि हिंदू समाज उनकी बात मान लेगा, यह व्यर्थ की कवायद कोर्ट द्वारा की गई है।

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने सवाल उठाया कि मध्यस्थता के लिए जो पैनल बनाया गया है उसमें अयोध्या के लोगों को क्यों दूर रखा गया। अयोध्या में भी समझौते की मुहिम हो चुकी है। संत-धर्माचार्य भी पहल कर चुके हैं। मुहिम चलाने वालों को भी पैनल में रखना चाहिए था। श्री श्री रविशंकर पहले भी आ चुके हैं, उनका विरोध भी हो चुका है।

ऐसे में यह पहल कितनी सार्थक होगी यह तो समय ही बताएगा। अभी से ही विरोध के सुर सुनाई देने लगे हैं समझौते की उम्मीद कम ही लगती है। आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि कोर्ट ने जो मध्यस्थता की पहल के लिए पैनल बनाया है। उसमें अयोध्या का कोई प्रतिनिधि नहीं है। मध्यस्थता की प्रक्रिया एक तरह से मामले को लटकाने का ही प्रयास है।

यह जरूरी नहीं है कि मध्यस्थता से इस मामले का समाधान निकल आएगा। चाहे मध्यस्थता से या फिर कोर्ट के निर्णय से कुछ भी हो रामलला टेंट से बाहर आकर भव्य मंदिर में शीघ्र विराजमान हों, हम सभी यही चाहते हैं। मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए पैनल पर सवाल उठाते हुए रामजन्मभूमि न्यास के सदस्य डॉ. रामविलास दास वेदांती ने कहा कि जिनका रामजन्म भूमि मसले से कोई संबंध नहीं है।

जो अयोध्या के इतिहास व परंपरा से अपरिचित हैं उनको पैनल में शामिल किया गया है। यह पैनल राजीव धवन व कपिल सिब्बल के इशारे पर बनाया गया है। अयोध्या में सिर्फ राममंदिर बनेगा, अयोध्या की सीमा के बाहर मस्जिद बने हमें कोई आपत्ति नहीं। अयोध्या में मस्जिद बनी तो आत्मदाह कर लूंगा। श्रीरामबल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने भी मध्यस्थता के लिए बनाए गए पैनल पर सवाल उठाया।

कहा कि जिनका अयोध्या से कोई संबंध नहीं है उनको पैनल में रखा गया है। राममंदिर आंदोलन से तमाम बुद्धिजीवी, संत-धर्माचार्य जुड़े रहे हैं ऐसे लोगों को पैनल में रखा जाना चाहिए। यह पैनल औचित्य विहीन है। श्री श्री रविशंकर को निशाने पर लेेते हुए कहा कि उनकी बात हिंदू समाज क्यों मानेगा? यह कोर्ट को समझना चाहिए था, अयोध्या में सिर्फ राममंदिर बनेगा।

महंत बृजमोहन दास ने कहा कि अयोध्या मामले में मध्यस्थता करने की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले ही तय हो चुका है कि यही रामजन्मभूमि है। हाईकोर्ट हमारे पक्ष में फैसला भी दे चुकी है, लेकिन मुस्लिम पक्ष नहीं मानेगा। अब मध्यस्थता की बात हो रही है। जो पैनल बनाया गया है वह भी संदेहास्पद नजर आता है। बातचीत करते-करते 70 साल बीत गए हैं, लेकिन कुछ निर्णय नहीं निकलेगा। कोर्ट को जल्द फैसला सुनाना चाहिए, अयोध्या में सिर्फ राममंदिर ही बनेगा।

विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता की पहल समझ से परे है। पहले भी समझौते की पहल हो चुकी है लेकिन मुस्लिम पक्ष भागता रहा है। रामलला यहां विराजमान हैं। यह पहले ही सिद्ध हो चुका है, पुरातात्विक साक्ष्य भी हैं। मध्यस्थता से आने वाले दिनों में क्या परिणाम आएंगे इस पर संशय है। एक बात तो तय है कि हिंदू पक्ष अयोध्या की सीमा में मस्जिद स्वीकार नहीं करेगा। अब पीछे हटने का प्रश्न ही नहीं है क्योंकि आज तक आहुति देकर ही राममंदिर के लिए संघर्ष होता आ रहा है।
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नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने काकी पैनल में एक हिंदू जज भी होना चाहिए। कहा कि श्री श्री रविशंकर तो पहले ही विवादित हो चुके हैं। निर्मोही अखाड़े के साथ दिल की बात भी सामने आई थी, ऐसे में उन्हें पैनल में रखने का क्या मतलब। उनके नेतृत्व में तो पहले भी पहल हो चुकी है लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला। पैनल में श्रीराम जन्म भूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को रखना चाहिए ऐसे संत हैं जो अयोध्या को स्वीकार है उनकी बात संत समाज मानेगा।
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