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बाराबांकी से दोहरीघाट तक डाल्फिन हब बनेगी सरयू

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बाराबंकी से दोहरीघाट तक डॉल्फिन हब बनेगी सरयू
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अयोध्या। विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी डॉल्फिन को संरक्षित करने के लिए अब बाराबंकी से वाया अयोध्या, दोहरीघाट (मऊ) तक डॉल्फिन हब बनाने की तैयारी है। इस इलाके के कराए गए सर्वे में 102 डॉल्फिन का पता चला है। सर्वे रिपोर्ट के बाद वन विभाग ने डॉल्फिन हब बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

सरयू में जल प्रदूषण रोकने के साथ अयोध्या में वन चेतना केंद्र खोले जाने की योजना भी है। इसमें पर्यटक डॉल्फिन को देखने के साथ इनके गुणों के बारे में सही जानकारी ले सकेंगे। सरयू में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के माध्यम से एक सर्वे हुआ था। इसमें बाराबंकी से दोहरी घाट तक सरयू क्षेत्र में 102 डॉल्फिन का होना बताया गया था।
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सर्वे के बाद से अब तक बाराबंकी से लेकर दोहरीघाट तक चार डॉल्फिन भी मिली हैं। वन विभाग ने इन चार नई डॉल्फिन को पकड़ कर सरयू में प्रवाहित किया। सभी डॉल्फिन वन विभाग की देखरेख में हैं। इन नई डॉल्फिनों के मिलने के बाद अयोध्या के वन रेंज ने सरयू को बाराबंकी से लेकर अयोध्या होते हुए मऊ जिले के दोहरीघाट तक डॉल्फिन हब के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।

इस क्षेत्र में सरयू में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के सख्त इंतजाम होंगे। कारण कि प्रदूषण से डॉल्फिन को खतरा रहता है। डॉल्फिन को रहने के स्वच्छ व मीठे पानी की आवश्यकता होती है। इस कारण वन विभाग ने नदी को संरक्षित किए जाने की बात कही है। नदी के संरक्षित हो जाने से सरयू में बाराबंकी से लेकर दोहरीघाट तक किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं किया जा सकेगा।

इसमें न तो नाले ही गिर सकेंगे न ही फैक्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी व कचरे प्रवाहित किए जा सकेंगे। माना यह जा रहा है कि अगर सरकार की ओर से प्रस्ताव को पास कर दिया जाता है तो मौजूदा समय की अपेक्षा सरयू और भी स्वच्छ व प्रदूषण मुक्त हो सकेगी। इससे विलुप्त हो रही डाल्फिन प्रजाति को संरक्षित किया जा सकेगा।

डीएफओ, अयोध्या डॉ.रवि कुमार सिंह ने बताया कि विलुप्त हो रही डॉल्फिन को बचाने के लिए सरयू को डॉल्फिन हब के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। सरयू में 106 डॉल्फिन मौजूद हैं। सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। सरयू नदी को बाराबंकी से लेकर दोहरीघाट तक संरक्षित करने की योजना है। मंजूरी के बाद योजना परवान चढ़ेगी।

साथ अयोध्या में वन चेतना केंद्र भी खोला जाएगा। इसमें पर्यटक डॉल्फिन को देख व इनके गुुणों के बारे में जानकारी ले सकेंगे। वन विभाग के विशेषज्ञ कहते हैं कि वास्तव में डॉल्फिन एक मछली नहीं है, वह तो एक स्तनधारी प्राणी है। जिस तरह व्हेल एक स्तनधारी प्राणी है वैसे ही डॉल्फिन भी इसी कैटेगरी में आती है। यह एक छोटी व्हेल की ही तरह है।

डॉल्फिन का रहने का ठिकाना समुद्र और नदियां हैं। डॉल्फिन को अकेले रहना पसंद नहीं है, यह सामान्यत: समूह में रहना पसंद करती है। इनके एक समूह में 10 से 12 सदस्य होते हैं। भारत में डॉल्फिन गंगा नदी में पाई जाती है लेकिन गंगा नदी में मौजूद डॉल्फिन अब विलुप्ति की कगार पर है। मौजूदा समय में इसका नया ठिकाना कम प्रदूषण के कारण सरयू नदी बन गया है।
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डॉल्फिन की एक बड़ी खासियत यह है कि यह कंपन वाली आवाज निकालती है। जो किसी भी चीज से टकराकर वापस डॉल्फिन के पास आ जाती है। इससे डॉल्फिन को पता चल जाता है कि शिकार कितना बड़ा और कितने करीब है। डॉल्फिन आवाज और सीटियों के द्वारा एक दूसरे से बात करती हैं। यह 60 किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से तैर सकती है। डॉल्फिन 10-15 मिनट तक पानी के अंदर रह सकती है लेकिन वह पानी के अंदर सांस नहीं ले सकती। उसे सांस लेने के लिए पानी की सतह पर आना पड़ता है।
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