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किसान के दावे को गन्ना विभाग ने माना फर्जी

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किसान के दावे को गन्ना विभाग ने बताया फर्जी
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फैजाबाद। 27 साल से गन्ना मूल्य भुगतान न मिलने के किसान के दावे को गन्ना विभाग ने फर्जी माना है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तत्कालीन समय समिति से फर्जी पर्ची छपवाकर किसान के पिता ने खेल किया था। जिसकी वजह से गन्ना तौल संबंधी कोई रिकॉर्ड न होने पर उसका भुगतान न किया गया और न ही संभव है। इन्हीं अनियमितताओं की वजह से किसान का उपभोक्ता फोरम, लोकायुक्त, उच्च न्यायालय समेत सभी पटलों से उसका दावा खारिज हो गया है।
जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह की मंगलवार को पिटाई मामले में डीसीओ ने किसान के दावे फर्जी बताकर अपना पक्ष पेश किया है। उन्होंने बताया कि मौजूदा अभिलेखों के अनुसार किसान रामतेज वर्मा ने पेराई सत्र 1990-91 में अपने पिता त्रिवेणी वर्मा के नाम से चार पर्चियों के गन्ने का 11 हजार रुपये मूल्य भुगतान न प्राप्त होना बताया गया है। जो कि अभिलेखों से मिलान करने पर पूर्णतया फर्जी पाई गईं। त्रिवेणी ने अपने अलावा अपने आसपास के कृषकों को भी फर्जी पर्ची पर सप्लाई कराई। जांचोपरांत त्रिवेणी के खिलाफ पूराकलंदर थाने में मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर भी दी गई थी। तत्कालीन दारोगा रहे हरिवंश राय ने कृषकों के समक्ष त्रिवेणी से पूछताछ की तो उसने लखनऊ से समिति की पर्ची बुकें छपवाने व समिति की सील मोहर बनवाकर उक्त फर्जीवाड़े को स्वीकारा था।
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इसके बाद रामतेज वर्मा ने 1992 में लघुवाद न्यायालय में वाद दायर किया। सचिव के साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद यह वाद 02 नवंबर 1993 को निरस्त हो गया। इसी बीच रामतेज ने 1993 में ही जिला उपभोक्ता फोरम में वाद प्रस्तुत किया जो 1997 में निरस्त हो गया। 2001 में मुख्यमंत्री से शिकायत करने पर गन्ना आयुक्त द्वारा उप गन्ना आयुक्त रहे महेंद्र चौबे से मामले की जांच कराई गई थी। उप गन्ना आयुक्त ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में उक्त फर्जीवाड़े का जिक्र किया था। डीसीओ ने बताया कि 12 अगस्त 2008 को उप गन्ना आयुक्त ने पूरे मामले की रिपोर्ट भी शासन को भेजी थी। समस्त पटलों से वाद निरस्तीकरण के बाद भी किसान ने इस तरह का कृत्य किया है। किसी प्रकार का रिकॉर्ड न होने की वजह से न तो उस समय भुगतान किया गया और न ही अब संभव है। वहीं चीनी मिल मसौधा के महाप्रबंधक कार्मिक व प्रशासन वीएन मिश्र ने भी मामले को फर्जी बताया और कहा कि समय से गन्ना मूल्य भुगतान करना चीनी मिल की प्राथमिकता है। गत वर्षों में सबसे पहले भुगतान के लिए चीनी मिल को सम्मानित भी किया गया है। ऐसे में किसी एक किसान का भुगतान न करने का आरोप समझ से परे है। यदि गन्ना आपूर्ति से संबंधित कोई रिकॉर्ड होता तो भुगतान अवश्य होता।

निजी मुचलके पर किसान रिहा
बीकापुर। जिला गन्ना अधिकारी की पिटाई के मामले में कोतवाली में बैठाए गए वृद्ध किसान रामतेज वर्मा को बुधवार दोपहर पुलिस क्षेत्राधिकारी के निर्देश के बाद कोतवाली पुलिस ने निजी मुचलके पर रिहा कर दिया। वृद्ध किसान रामतेज वर्मा के साथ कोतवाली के बाहर बाजार में मौजूद एक दर्जन से अधिक किसानों और समर्थकों ने उनके प्रति सहानुभूति जताई। मालूम हो कि मंगलवार को संपूर्ण समाधान दिवस में बकाया गन्ना पैसे के भुगतान के मामलों को लेकर पातुपुर दोहरी निवासी 75 वर्षीय किसान ने जिला गन्ना अधिकारी हेमराज सिंह की पिटाई कर दी थी। जिसके बाद कोतवाली पुलिस ने बुजुर्ग किसान को हिरासत में लेकर जिला गन्ना अधिकारी की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की है। प्रभारी कोतवाली उप निरीक्षक घनश्याम पाठक ने बताया कि आरोपी किसान रामतेज वर्मा को निजी मुचलके पर रिहा किया गया है।
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हर बार लगाई गई गलत आख्या : रामतेज
बीकापुर। संपूर्ण समाधान दिवस में मंगलवार को बकाया गन्ने के पैसे के मामले को लेकर हंगामा करने वाले वृद्ध किसान रामतेज वर्मा निवासी दोहरी पातुपुर कोतवाली बीकापुर का कहना है कि गन्ने के पैसे के भुगतान के लिए वह अधिकारियों से 27 वर्षों से लगातार शिकायतें कर रहा है। शिकायत की जांच के बाद के बाद अधिकारियों द्वारा गलत आख्या लगाई जाती है। बताया कि पेराई सत्र 1990-91 के दौरान उनके पिता त्रिवेणी वर्मा के नाम जारी हुई दो गन्ना परची पर 26 मार्च तथा 30 मार्च 1991 को शुगर मिल में गन्ने की तौल कराया है। जबकि गन्ना बिक्री पर्ची नहीं मिलने पर खुली बिक्री के दौरान 5 अप्रैल और 9 अप्रैल 1991 को दो ट्रॉली गन्ना तोल कराया था। गन्ना समिति द्वारा गन्ना तौल कराने के बाद गन्ना तौल कराने की पर्ची दी है, जो मेरे पास है। इस पर मूल्य अंकित हैं लेकिन भुगतान नहीं हुआ।
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