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10.77 करोड़ में रामनगरी के तीन कुंडों का होगा कायाकल्प

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10.77 करोड़ से तीन कुंडों का होगा कायाकल्प
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अयोध्या। लंबे समय से उपेक्षित चल रहे रामनगरी के कुंडों के कायाकल्प की उम्मीद जगी है। नगर निगम अयोध्या ने इसके लिए पहल की है, पहले फेज में शासन को अयोध्या के तीन कुंडों के सुंदरीकरण के लिए 10 करोड़ 77 लाख खर्च का प्रस्ताव बनाकर भेजा है। प्रस्ताव का अनुमोदन होते ही कुंडों के सुंदरीकरण का कार्य शुरू हो जाएगा। इसके अलावा ऐतिहासिक मणिपर्वत को भी पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना बन रही है।
रामनगरी में करीब दो दर्जन पौराणिक महत्व वाले कुंड हैं। जिनमें से ज्यादातर का अस्तित्व समाप्त होने को है। कुछ अवैध कॉलोनियों का रूप लेते जा रहे हैं। तमाम कुंडों में गंदगी से जल आचमन लायक नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों की मांग पर शहर के मध्य स्थित दंतधावन कुंड, पौराणिक विद्याकुंड व सीताकुंड के कायाकल्प का प्रयास नगर निगम अयोध्या ने किया है। नगर के मध्य स्थित दंतधावनकुंड अव्यवस्था का शिकार है। पौराणिक महत्व वाले विद्याकुंड की भी स्थिति ठीक नहीं है। अभी हाल ही में कुंड का जल सूखने लगा था, जिससे बड़ी संख्या में जलीय जीव जंतुओं की मौत भी होने लगी थी। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत सांसद व महापौर से की थी। जिसके बाद नगर निगम ने कुंड में पानी भरवाने की वैकल्पिक व्यवस्था की। सीताकुंड में जल के साथ घाट व सीढ़ियां तो सलामत हैं पर रख-रखाव के अभाव और लंबी उपेक्षा के चलते वे अपनी विरासत से न्याय नहीं कर पा रहे हैं, अब इनके सुंदरीकरण की उम्मीद जगी है। नगर निगम अयोध्या के महापौर ऋषिकेश उपाध्याय ने बताया कि अयोध्या की पहचान से जुड़े लंबे समय से उपेक्षित पड़े तीन कुंडों दंतधावन कुंड, विद्याकुंड व सीताकुंड के सुंदरीकरण के लिए शासन को 10 करोड़ 77 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। उम्मीद है कि शीघ्र ही शासन से अनुमति मिल जाएगी और अनुमति मिलते ही कुंडों के सुंदरीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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कुंडों में लगेगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
अयोध्या के तीन कुंडों के सुंदरीकरण योजना के तहत इन कुंडों के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाएंगे। जिससे कुंड जलविहीन न होने पाए। इसके अतिरिक्त कुंडों के आस-पास उद्यान विकसित करने की योजना है। पर्यटन विकास के लिए भी कई कार्य किए जाएंगे। साथ ही इनकी देख-रेख का कार्य भी सुनिश्चित किया जाएगा। कुंडों के आस-पास सफाई एवं प्रकाश व्यवस्था को भी दुरुस्त रखने पर जोर होगा।
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पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा मणिपर्वत
ऐतिहासिक मणिपर्वत के भी कायाकल्प की तैयारी नगर निगम बना रहा है। इसके लिए महापौर ने कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पेश किया है, जैसे ही प्रस्ताव पर मुहर लगेगी काम शुरू हो जाएगा। पुराणों व ग्रंथों में मणिपर्वत का उल्लेख है। मणिपर्वत को लेकर कई किवंदतिया हैं। पौराणिक कथा के अनुसार माता सीता द्वारा मांगे गए मणिहार के लिए राजा जनक जनकपुर से बैलगाड़ियों पर मणियां लेकर आए। जिसे अशोक वन में रखवाया गया। इन्हीं असंख्य मणियों से मणिपर्वत का निर्माण हुआ। बताते हैं कि भगवान सीताराम चार्तुमास के दौरान यहीं पर वास करते हैं। अयोध्या के सावन झूलनोत्सव का भी श्रीगणेश मणिपर्वत पर हर वर्ष लगने वाले मेले से ही होता है। मणिपर्वत जर्जर हो चुका है, इसकी देखरेख पुरातत्व विभाग के अधीन है, विभाग ने यहां खतरे का बोर्ड भी लगा रहा है जबकि हर साल सावन मेले में लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन को आते हैं। अब नगर निगम मणिपर्वत परिसर में झूला, सामुदायिक केंद्र आदि बनवाने की योजना बना रहा है।
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