अवध विश्वविद्यालय के ताजा फैसले से संबद्ध निजी कॉलेजों में 70 फीसदी सीटें कम हो गई हैं। इसी के साथ इन कॉलेजों ने नुकसान की भरपाई के लिए फीस करीब दोगुनी कर दी है। जानकार बताते हैं कि जिन कॉलेजों में पहले बीए जैसे पाठ्यक्रम में 1500 सीटें थीं, वहां अब महज 450 सीटें ही बची हैं। अगर कॉलेज प्रबंधन को विवि से नए सेक्शन की अनुमति नहीं मिल पाई, तो इंटर उत्तीर्ण छात्रों को इस वर्ष एडमिशन के लिए तरसना पड़ेगा। उधर, सीटों की संख्या कम होने से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए कॉलेजों ने एकाएक 50 फीसदी से अधिक फीस बढ़ा दी है। इससे न केवल छात्र-छात्राएं, बल्कि उनके अभिभावक भी परेशान हैं।
गौरतलब है कि अवध विवि ने पिछले दिनों नए शैक्षिक सत्र 2015-16 के लिए संबद्ध निजी (स्व-वित्तपोषित) कॉलेजों में सीटों का निर्धारण नए नियमों के तहत कर दिया है। अबकी बार अनुमोदित शिक्षकों की संख्या के बजाय सेक्शन वार सीट मैट्रिक्स के आधार पर सीटें निर्धारित की गई हैं। इसमें बीए व बीएससी के एक सेक्शन में प्रत्येक विषय पर महज 60 सीटें आवंटित की गई हैं। इस वजह से बड़े निजी कॉलेजों में सीटों की संख्या काफी घट गई हैं। उदाहरण के तौर पर अगर किसी कॉलेज में बीए में अनुमोदित 20 शिक्षकों के सापेक्ष 1200 सीटें रहीं तो अब इसकी संख्या केवल 300 या इससे भी कम हो गई है। यदि किसी कॉलेज में बीए पाठ्यक्रम में पांच विषय संचालित हो रहे हैं, तो कॉलेज में केवल 300 सीटों पर ही एडमिशन हो सकेगा। हालांकि विवि ने शासनादेश के अनुसार ही सीटों का निर्धारण किया है, पर नए निर्णय से छोटे-बड़े सभी कॉलेजों के प्रबंधन परेशान हैं। दरअसल, अब अगर किसी कॉलेज को अपने यहां सीटों की संख्या बढ़वानी है, तो उसे विवि से नए सेक्शन की अनुमति लेनी होगी। कॉलेज के आवेदन पर विवि उपलब्ध संसाधनों की दृष्टि से विचार करेगा, तभी सीटें बढ़ सकेंगी। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि जिले के इंटरमीडिएट उत्तीर्ण विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए आखिर किन कॉलेजों में प्रवेश लेंगे, जब सीटों की संख्या सीमित हो गई है। इस बारे में न तो सीटों के निर्धारण के लिए गठित सीट मैट्रिक्स समिति ने विचार किया और न ही विवि प्रशासन ने छात्रों के भविष्य के बारे में सोचा।
दूसरी ओर सीटों की संख्या घटने से निजी कॉलेजों को हुए नुकसान की भरपाई कॉलेज प्रबंधन की ओर से शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि संबद्ध निजी कॉलेजों में बीए, बीएससी व बीकॉम पाठ्यक्रम मेें फीस काफी बढ़ा दी गई है। जानकार बताते हैं कि जिन कॉलेजों में पहले तीन से साढ़े तीन हजार रुपये बीए में फीस ली जाती थी, वहां इस साल सात-आठ हजार रुपये फीस कर दी गई। ऐसे में विवि के नए फैसले का खामियाजा अंतत: छात्रों व उनके अभिभावकों को भुगतान पड़ेगा। वजह ये कि विवि प्रशासन का निजी कॉलेजों की फीस पर कोई नियंत्रण नहीं है। लिहाजा, विवि का निर्णय परोक्ष-अपरोक्ष रूप से छात्रों व अभिभावकों के लिए घातक सिद्ध होगा।