कोर्ट से ही सुलझेगा अयोध्या मामला : इंद्रेश
अयोध्या। खोदाई के दौरान मंदिर होने का सबूत मिलने के बाद मुसलमानों को मस्जिद का दावा छोड़ देना चाहिए। कोर्ट से ही इस मामले का निस्तारण होगा। मेरी 22 से अधिक मुस्लिम देशों से रामजन्मभूमि, तिरंगा, गाय, तीन तलाक सहित अन्य विषयों पर बात हो चुकी है, किसी ने भी असहमति नहीं जताई है। अयोध्या के आसपास के 13 जिलों में राममंदिर को लेकर मुस्लिम सम्मेलन भी कर चुका हूं। माहौल अब हमारे हक में बदल रहा है। कट्टरपंथी परेशान हैं, हिंदुस्तान उनकी सुन नहीं रहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तीन तलाक में टूटा। अयोध्या मामले पर बंट गया और कुछ दिन में पूरी तरह टूट जाएगा। यह बातें राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश ने बृहस्पतिवार को यहां कहीं। वे अयोध्या के हिन्दूधाम में महंत दिलीप दास त्यागी के संयोजन में हो रहे सवा करोड़ पार्थिव शिवलिंग रुद्राभिषेक अनुष्ठान के क्रम में आयोजित संत सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अयोध्या में रामजन्म स्थान था, है और रहेगा। अयोध्या में न कभी मस्जिद थी, न है और न होगी। एक अत्याचारी विदेशी आक्रांता ने अवैध विवादित ढांचा बनाने की कोशिश की जो कभी बन नहीं सकी। इसे बाबरी मस्जिद नहीं अवैध विवादित ढांचा बोलना चाहिए। इतने वर्षों का संघर्ष समाधान की ओर बढ़ रहा है। इसे विश्व की कोई ताकत नहीं रोक सकती। कहा कि हाईकोर्ट ने फैसला किया विवादित हिस्सों को तीन भागों में बांट दिया। एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को दिया, निर्मोही अखाड़ा ने विभाजन क्यों स्वीकार कर लिया समझ में नहीं आता, कहना चाहिए था कि रामलला की भूमि है उन्हीं की रहेगी। अब सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। जहां निर्णय होना है कि जमीन किसकी है, फैसला रामलला के पक्ष में ही आएगा। सुप्रीम कोर्ट बंटवारा नहीं करेगा क्योंकि बंटवारे का केस ही नहीं है। हमारी पूजा, अनुष्ठान सेे यह ताकत मिले कि सुप्रीम कोर्ट सही का फैसला जल्दी कर दे। मुस्लिमों को अपना दावा छोड़ देना चाहिए, उन्होंने कहा था कि यदि विवादित भूमि पर मंदिर सिद्ध हो जाएगा तो वह दावा छोड़ देंगे।
संत सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास ने कहा कि राममंदिर निर्माण के लिए माहौल बनाने की जरूरत है। अयोध्या में आयोजित सवा करोड़ रुद्राभिषेक अनुष्ठान से अब शीघ्र ही राममंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा। दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास ने कहा कि रामजन्मभूमि पर मंदिर तो है ही। आरती-पूजन भी हम कर ही रहे हैं, अब उसे भव्य रूप देना ही बाकी है। अब वह दिन दूर नहीं जब अयोध्या में भव्य राममंदिर सबके सामने होगा। महंत रामशरण दास ने कहा कि अनुष्ठान कभी विफल नहीं होते, सवा करोड़ रुद्राभिषेक से शीघ्र ही राममंदिर निर्माण का संकल्प पूरा होगा। महामंडलेश्वर गिरीश दास ने कहा कि राममंदिर निर्माण की मांग होनी चाहिए। किसी भी दशा में हमें रामलला का भव्य मंदिर चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य रघुनाथ दास शास्त्री ने किया। संत सम्मेलन को महंत नारायणाचारी, महंत शशिकांत दास, महंत परमहंस दास, ज्ञानी गुरूजीत सिंह समेत अन्य ने भी संबोधित किया। संत सम्मेलन में महंत रामप्रकाश दास, महामंडलेश्वर बजरंग दास, महंत बृजमोहन दास, डॉ. देवेशाचार्य, अर्मा टांडवी, आचार्य शिवेंद्र, स्वामी बाल भरत व्यास, चरनजीत सिंह, अवध प्रांत के प्रभारी डॉ.अनिल सिंह, प्रांत प्रचारक सुरेंद्र, संत मुरारी दास, विशाल मिश्र, मजाहिर खान,सहित अन्य मौजूद रहे।
राममंदिर के लिए घर-घर करें अनुष्ठान
राष्ट्ीय स्वंय सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इंद्रेश ने संत सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह से राममंदिर के लिए घर-घर अनुष्ठान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम घर में जो पूजा-पाठ, जप, तप करते हैं व राममंदिर निर्माण को संकल्पित होना चाहिए।
अयोध्या में बनना चाहिए राममंदिर : मौलाना कौकब मुस्तफा
संत सम्मेलन में मुस्लिमों ने भी भागीदारी की। शिया धर्म गुरू मौलाना कौकब मुस्तफा ने कहा कि अयोध्या राम की जन्मभूमि है इसलिए यहां भव्य राममंदिर बनना चाहिए। इस्लाम कट्टरपंथी को इजाजत नहीं देता, विवादित भूमि पर नमाज जायज नहीं है। वहीं किछौछा शरीफ दरगाह के मौलाना इरफान ने मंच से हनुमान चालीसा, गायत्री मंत्र का पाठ किया और गणेश स्तुति की। कहा कि राम सबके हैं, हम सब न हिंदू हैं, न मुसलमान हैं, हम सब हिंदुस्तानी हैं।