रामनगरी में जगह-जगह अंतिम यात्रा पर पुष्प अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि
अयोध्या। नाका हनुमानगढ़ी से शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे अयोध्या सरयू तट के लिए निकली अंतिम यात्रा पर जगह-जगह पुष्पवर्षा कर लोगों ने महंत भास्कर दास के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित की।
वैष्णव संप्रदाय की परंपरा के अनुसार, दिवंगत महंत के लिए रथ तैयार किया गया। इसके बाद उन्हें उस पर आसीन करके अंतिम यात्रा नगर के फतेहगंज, चौक, साहबगंज, अमानीगंज, बेनीगंज के रास्ते होते हुए अयोध्या पहुंची।
अंतिम यात्रा के रामनगरी पहुंचने पर अयोध्यावासियों का महंत के प्रति अपनत्व छलक पड़ा। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर लोगों ने उन्हें नमन किया। दोपहर करीब 1:30 बजे अंतिम यात्रा निर्मोही अखाड़ा पहुंची।
यहां निर्मोही अखाड़ा अयोध्या के महंत दिनेंद्रदास ने श्रद्धासुमन अर्पित किया। इसके बाद जानकीघाट, बड़ा स्थान, श्रीरामबल्लभाकुंज मंदिर, डांडिया मंदिर पर भी संतों-महंतों ने महंत भास्कर दास का अंतिम दर्शन किया।
इसके बाद करीब 1:45 बजे अंतिम यात्रा मणिराम छावनी पहुंची। यहां पर मंदिर के महंत न्यास अध्यक्ष नृत्यगोपाल दास व उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महंत ज्ञानदास, अयोध्या नरेश बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र आदि ने पुष्पांजलि अर्पित की।
तदुपरांत अंतिम यात्रा सरयू तट पहुंची, जहां नाका हनुमानगढ़ी के पुजारी रामदास ने दिवंगत महंत को मुखाग्नि दी। बताया गया कि निर्मोही अखाड़ा में शव प्रवाहित करने और मुखाग्नि देने की परंपरा प्रचलित है, इसलिए भास्कर दास को मुखाग्नि देने का निर्णय लिया गया।
सरयू तट पर पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में भाजपा के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक, सांसद लल्लू सिंह, गोसाईगंज विधायक खब्बू तिवारी, अयोध्या विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, रुदौली विधायक रामचंद्र यादव, बीकापुर विधायक शोभा सिंह सहित महंत कमलनयन दास, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, महंत रामशरण दास रंगमहल, ज.गु. रामदिनेशाचार्य, अधिकारी रामबल्लभाकुंज राजकुमार दास, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत मनमोहन दास, महंत रामकुमार दास, महामंडलेश्वर गिरीशदास, हनुमानगढ़ी के पुजारी रमेश दास, राजू दास, महंत शशिकांत दास, संत एमबी दास आदि शामिल थे।
आशावादी संत ने कभी हार नहीं मानी
वे आशावादी संत थे, उन्होंने न्यायालय की लंबी लड़ाई में कभी भी हार नहीं मानी। अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने अपनी संपत्ति तक बेच डाली। वृद्ध होने के बाद भी वह लगातार छह साल तक हाईकोर्ट में मुकदमे की पैरवी करने जाते रहे।
वर्ष 2003 में उन्हें कोर्ट में ही पैरालिसिस का साइलेंट अटैक आ गया था। बाद में उनका उपचार जिला अस्पताल फैजाबाद में कराया गया। उनके जीवन की एक ही इच्छा थी कि अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बने।
सुबह महंत भास्कर दास की मृत्यु की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझसे फोन पर बात कर अपनी शोक संवेदना जताई। शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे आए फोन में सीएम ने महाराजश्री को श्रद्धांजलि देने के लिए अयोध्या आने का भरोसा भी दिया।
- रामदास, उत्तराधिकारी नाका हनुमानगढ़ी।