कई लोगों ने उधार लेकर अप्रैल में बच्चों के दाखिले कराए। वे बकाया चुकाना तो दूर अब जुलाई में तीन माह फीस कहां देंगे इसे सोचकर परेशान है।
पूरे मामले में न रिनीवल का झंझट है, न शासन से कोई रोक। सारी अड़चन जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक न होना है। पिछली समीक्षा बैठकों में डीएम ने कई घपले के मामलों में सीएमओ समेत कईयों पर सवाल उठाए, इसी के कारण संविदा कर्मियों के भुगतान का अनुमोदन भी फंस गया है।
संविदा कर्मी अप्रैल माह से कार्य तो कर रहे हैं। लेकिन उनको वेतन नहीं मिल रहा है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ रहा है। इस बारे में सीएमओ का कहना है कि संविदा कर्मियों को वेतन के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक और जिलाधिकारी की अनुमति मिलने के बाद ही संविदा कर्मियों को वेतन दिया जा सकेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत मां और बच्चे को पूरी तरह प्रतिरक्षित करने के लिए गांव स्तर पर विविध कार्यक्रमों का संचालन किया गया।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए उपकेंद्रों पर संविदा पर एएनएम रखी गई। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए आशीर्वाद बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना शुरू की गई।
इन सभी परियोजनाओं में कार्यरत चिकित्सक और कर्मचारियों को इस वित्तीय वर्ष अप्रैल माह से वेतन नहीं मिला है। योजनाओं से जुड़े चिकित्सक वेतन नहीं मिलने से आहत है।
एनआरएचएम के तहत स्वास्थ्य विभाग में लगभग 50 स्टाफ नर्स, 24 आयुष चिकित्सक, आठ डेंटल, सात फिजीयोथिरैपिस्ट, दो लेडी मेडिकल अफसर, एक बाल रोग विशेषज्ञ, दो गाइनोलाजिस्ट, 11 फेमली वेलफेयर काउंसलर समेत लगभग 350 कर्मचारी तैनात है।
इन कर्मचारियों को अप्रैल माह से वेतन नहीं दिया गया है। इसके अलावा अरबन हेल्थ पोस्ट पर जनवरी माह से तैनाती 16 कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिल पा रहा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राधेश्याम यादव का कहना है कि जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक अभी तक नहीं हो पाई है। जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष द्वारा संस्तुति दिए जाने के बाद ही संविदा कर्मियों को वेतन दिया जा सकेगा।