623 डिग्री कॉलेज चला सकेंगे बी-वोक कोर्स
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की विद्या परिषद की बैठक में शनिवार को बैचलर ऑफ वोकेशनल कोर्स की मान्यता महाविद्यालयों को देने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई।
शासन की ओर से तीन जनवरी 2019 को जारी सर्कुलर को विद्या परिषद ने मंजूर कर लिया गया। विवि से संबद्ध 623 महाविद्यालय अपने यहां वोकेशनल कोर्स संचालित कर सकते हैं।
कौटिल्य प्रशासनिक भवन के सभागार में शनिवार को कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित की अध्यक्षता में विद्या परिषद की बैठक आयोजित हुई। इसमें परीक्षा समिति की बैठक में शोध उपाधि के लिए संस्तुत शोधार्थियों के अनुमोदन पर भी विचार किया गया।
प्रवेश समिति की बैठक में पीएचडी में प्रवेश के संबंध में हुए निर्णयों पर विचार हुआ। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के राजपत्र के द्वारा दिये गये दिशा-निर्देश के तहत उच्चतर शिक्षा संस्थानों में अकादमिक सत्यनिष्ठा और साहित्यिक चोरी की रोकथाम के बारे में विद्या परिषद को जानकारी दी गई।
इसके साथ ही कुलसचिव रामचंद्र अवस्थी ने विद्या परिषद को बताया कि शोध छात्रों को अब विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित प्रारूप पर ही शोध ग्रंथ जमा करना होगा। इसके साथ ही शोधकर्ता द्वारा शोध ग्रंथ की सॉफ्ट कॉपी पीडीएफ फार्मेट में एक सीडी में जमा करनी होगी।
कुलसचिव ने बताया कि परिसर में संचालित स्नातक एवं परास्नातक तथा शोध पाठ्यक्रमों में भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल तथा विदेशी छात्रों के लिए पांच सीटें आरक्षित करने पर विचार हुआ।
इसके अलावा कला संकाय में सिंधी भाषा के अंतर्गत संचालित पाठ्यक्रमों की सैद्धांतिक सहमति एवं डॉ. प्रियंका सिंह द्वारा उनके पति स्व. डॉ. प्रदीप कुमार सिंह के नाम पर परास्नातक पाठ्यक्रम के राजनीति विज्ञान विषय में सर्वाधिक अंक पाने वाले छात्र-छात्राओं को पदक प्रदान करने के आवेदन पर विचार किया गया।
समिति के निर्णय में शिक्षा संकाय बीएड व एमएड पाठ्यक्रम की सैद्धांतिक परीक्षा में एक अंक का श्रेणी कृपांक देने पर निर्णय लिया गया।
बैठक में किसान पीजी कॉलेज बहराइच को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा एनएचक्यूएफ योजना के अंतर्गत स्वीकृत पाठ्यक्रम के संबंध में निर्णय लिया गया।
विवि के इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ साइंसेज के एमएससी जियोलॉजी, जियोग्राफी, रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस पीजी डिप्लोमा के पाठ्यक्रमों में संशोधित नियमावली एवं अध्यादेश के बिंदुओं पर विचार किया गया।
व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग के अंतर्गत प्रस्तावित द्विवर्षीय चार सेमेस्टर के एमबीए टूरिज्म एवं एमबी हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए निर्णय लिया गया।
बीबीए पाठ्यक्रम के षष्टम सेमेस्टर में वैट एवं सर्विस टैक्स के स्थान पर जीएसटी पाठ्यक्रम का संशोधित कर दिया गया है। एमबीए एग्री बिजनेस के बिंदुओं पर विचार किया गया।
भौतिकी एवं इलेक्ट्रानिक्स विभाग में पूर्व से चल रहे बीएससी में तृतीय विकल्प के रूप में भौतिक विज्ञान रसायन विज्ञान, गणित के साथ बीएससी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने एवं सूक्ष्म जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान के साथ बीएससी पाठ्यक्रम तथा सूक्ष्म विज्ञान, जीव रसायन विज्ञान एवं जीव रसायन विज्ञान के स्नातक स्तर पर संचालन करने का निर्णय लिया गया।
आवासीय परिसर में पीजी डिप्लोमा इन एरोमा टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने तथा गणित एवं सांख्यिकी के संशोधित पाठ्यक्रमों के अनुमोदन पर विचार किया गया।
कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित ने विश्वविद्यालय में चल रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों में च्वाइस्ड बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पैटर्न पर पाठ्यक्रम बनाने के लिए एक कमेटी बनाने की संस्तुति दी।
संबद्ध महाविद्यालयों का आह्वान करते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े रहने के लिए महाविद्यालयों को भी सीबीसीएस पैटर्न अपनाना चाहिए, नहीं तो वे शिक्षा के मूल धारा से अलग-थलग पड़ जायेंगे।
आवासीय परिसर में संचालित समस्त सेमेस्टर पाठ्यक्रमों में सत्र 2019-20 से परीक्षाओं को मिड सेमेस्टर एवं इंड सेमेस्टर में कराने पर विचार किया गया। मूल्यांकन के उपरांत उत्तर पुस्तिकाएं छात्र-छात्राओं को दिखाई जाएगी।
मिड परीक्षा के प्रश्न-पत्रों का निर्माण तथा मूल्यांकन पूर्णतया आंतरिक होगा। इंड सेमेस्टर में प्रश्न-पत्रों से सम्बन्धित सम्पूर्ण पाठ्यक्रम पर आधारित 50 प्रश्नों के बहुविकल्पीय प्रश्न ओएमआर के माध्यम से पूछे जायेंगे। दोनो ही परीक्षाएं 50-50 अंकों की होगी।