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एशिया के तीर्थ स्थलों में अयोध्या का बड़ा महत्व: प्रो. दीक्षित

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एशिया के तीर्थ स्थलों में अयोध्या का बड़ा महत्व : प्रो. दीक्षित
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फैजाबाद। अयोध्या तीर्थ को विश्व की विरासत में सम्मिलित होना जरूरी है। एशिया के तीर्थ स्थलों में अयोध्या का बड़ा महत्व है। भारत में पहली बार आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में इस तीर्थ स्थल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानक पर लाने के लिए तर्कपूर्ण परिणाम सामने आएंगे। यह बातें अवध विवि के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कही।

वे मंगलवार को डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ करने के बाद उद्घाटन सत्र में बोल रहे थे। कहा कि यह सौभाग्य है कि एशियन कल्चरल लैंड स्केप एसोसियेशन के सौजन्य से एशिया के सांस्कृतिक परिदृश्य में तीर्थयात्रा संबंधित शहरों में पर्यटन की संभावनाएं विषय पर भारत में पहली बार आयोजित होने वाली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी की मेजबानी का अवसर प्राप्त हुआ।
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उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी में होने वाले विचार विमर्श से अयोध्या तीर्थ को विश्व की विरासत में सम्मिलित किए जाने वाले तथ्यों पर तर्कपूर्ण परिणाम सामने आएंगे। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि एशियन कल्चरल लैंड स्केप एसोसियेशन के संस्थापक अध्यक्ष कोरिया से आये हुए प्रो. सुंग क्यून किम ने कहा कि भारतवासी जिसमें अयोध्या के लोग अतिथियों स्वागत एवं सत्कार के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

कहा कि आज मैं अयोध्या की धरती पर आकर धन्य हो गया। अपने शोध प्रस्तुत करते हुए बताया कि हमें अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विकसित कर पर्यटन के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाना होगा तथा धरोहरों के परिदृश्य को सुंदरता के लोगों के सामने प्रस्तुत करना होगा। उन्होंने कोरिया के एक छोटे से प्रांत पूंग-सू के अनेक प्राकृतिक स्थलों को स्लाइड के माध्यम से विस्तार दिखाते हुए समझाया कि इन सभी छोटे-छोटे स्थलों को प्राकृतिक पर्यटन के रूप में विकसित किया गया है जिन्हें पहले कोई नही जानता था।

अंत में उन्होंने बौद्ध सर्किट को विकसित करने की पुरजोर वकालत करते हुए अपना शोधपत्र समाप्त किया। इससे पूर्व एशियन कल्चरल लैण्ड स्केप एसोसियेशन के अध्यक्ष प्रो. राना पीबी सिंह ने एसोसिएशन की तरफ से आये हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। एसोसिएशन की स्थापना एवं उद्देश्य के बारे में विस्तार से बताया। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. आरबी सिंह ने अपने उद्बोधन में पर्यटन को पर्यावरण एवं स्वच्छता से जोड़ते हुए ईको पर्यटन के बारे में विस्तार से बताया।

कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि अयोध्या की इस पावन धरती पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से अयोध्या की संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक महत्व से सभी शोर्धार्थियों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होगा। दिल्ली हेरिटेज मैनेजमेंट संस्थान के निदेशक प्रो. मक्खन लाल ने कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को हमेशा याद रखना चाहिए।

अगर हम आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं तो हम उसकी क्षतिपूर्ति किसी न किसी माध्यम से कर लेते हैं। परंतु अगर हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को भूल जाते हैं तो, उसकी क्षतिपूर्ति कभी नहीं हो सकती। धन्यवाद ज्ञापन में इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व के विभागाध्यक्ष एवं संगोष्ठी के संयोजक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों, शोधार्थियों एवं महाविद्यालय से आये सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों का स्वागत करते हुए कहा कि अयोध्या में विरासतों की पूरी एक श्रृंखला है।
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जिसे हमें विश्व पटल पर प्रस्तुत करके पर्यटन को बढ़ाना होगा। कार्यक्रम का संचालन प्रो. फारूख जमाल ने किया। कार्यक्रम में शोधपत्र पढ़ने वाले प्रो. अनीता आरिफ इंडोनेशिया, प्रो. अनीता सिन्हा अमेरिका, डॉ. न्योमैन वर्दी इटली, प्रो. मैटियो डेरियों इटली, प्रो. पालियो, प्रो. बाला कृण्णन, प्रो. देवाशाष नायक, प्रो. गीतांजली, प्रो. ज्योति रोहिल्ला, प्रो. एसके गर्ग, प् शिक्षक के साथ विश्वविद्यालय के कर्मचारी एवं छात्र/छात्राएं उपस्थित रहे।
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