‘भागवत कथा सुनने से होता है मन का शुद्धिकरण’
फैजाबाद। कथा की सार्थकता तभी सिद्ध होती है, जब इसे हम अपने जीवन में व्यवहार में धारण कर निरंतर हरि का स्मरण करते हुए जीवन को आनंदमय, मंगलमय बनाकर अपना आत्मकल्याण करें। भागवत कथा सुनने से मन का शुद्धिकरण होता है। इससे संशय दूर होता है और शांति व मुक्ति मिलती है। इसलिए सद्गगुरू की पहचान कर उनका अनुकरण एवं निरंतर हरि का स्मरण, भागवत कथा श्रवण करने की जरूरत है।
यह उद्गार कथाव्यास डॉ. श्याम सुंदर पाराशर ने व्यक्त किए। वे दशरथ महल बड़ास्थान के श्री महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देंवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता एवं महंत रामभूषण दास कृ़पालु महाराज के संयोजन में नंदीग्राम भरतकुंड में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ अवसर पर व्यासपीठ से भक्तों को कथामृत का पान करा रहे थे। दशरथ महल के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य ने भक्तों को कथा की सुधावृष्टि करते हुए कहा कि सत्संग व कथा के माध्यम से मनुष्य भगवान की शरण में पहुंचता है, वरना वह इस संसार में आकर मोहमाया के चक्कर में पड़ जाता है, इसीलिए मनुष्य को समय निकालकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही प्राणी मात्र का कल्याण संभव है। इससे पूर्व महंत रामभूषण दास ने उपस्थित संतों का स्वागत सत्कार किया। इस मौके पर बड़ा भक्तमाल के महंत अवधेश दास, रंगमहल के महंत रामशरण दास, जानकीघाट बड़ास्थान के महंत जन्मेजय शरण, नागा रामलखन दास, संत एमबीदास, भरतकुंड के पुजारी राजेंद्र दास आदि मौजूद रहे।