अवध विवि के 171 कॉलेज ब्लैक लिस्टेड
फैजाबाद। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। तैनात शिक्षकों का ऑनलाइन सत्यापन नहीं करने वाले 171 डिग्री कॉलेजों को ब्लैक लिस्टेड कर दिया है। कार्रवाई की पत्रावली पर शनिवार को कुलपति की संस्तुति के बाद कुलसचिव ने तत्काल प्रभाव से आदेश भी जारी कर दिया है। ब्लैक लिस्टेड कॉलेजों को इस साल मुख्य परीक्षा में केंद्र बनाने के साथ नए सत्र 2018-19 से सभी कक्षाओं में दाखिला लेने पर भी रोक लगा दी गई है। कार्रवाई से अवध के 10 जिलों में 70 हजार से अधिक विद्यार्थियों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय संबद्ध स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों का ब्योरा कुलपति ने ऑनलाइन करने का आदेश दिया था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यरत 6445 शिक्षकों का डाटा कंप्यूटरीकृत किया तो, परीक्षणोपरांत 1528 ऐसे शिक्षक पाए गए, जो एक से अधिक महाविद्यालयों में पढ़ाते दिखाए गए थे। इसमें कई वित्त पोषित कॉलेजों के प्राचार्य, प्रोफेसर व प्रवक्ताओं के नाम भी थे। विश्वविद्यालय के कुलसचिव संजय कुमार ने बताया कि सभी महाविद्यालयों के प्रबंधन से तैनात शिक्षकों का विवरण टीचर प्रोफाइल पर भरते हुए कालेज लॉग-इन के माध्यम से सत्यापित कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही अनिवार्य किया गया कि प्रत्येक शिक्षक के विवरण को आधार नंबर से जोड़े और वेतन उनके बैंक खाते के माध्यम से करें। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सभी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से टीचर प्रोफाइल में आधार नंबर, पैन नंबर, बैंक का नाम, खाता संख्या, आईएफएससी कोड, ईमेल आईडी व मोबाइल नंबर भरने को कहा गया। जो शिक्षक एक से अधिक महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य करते प्रदर्शित हो रहे हैं, उनके संबंध में संबंधित महाविद्यालयों द्वारा शिक्षक से 10 रुपये के स्टांप पेपर पर फोटोयुक्त शपथ पत्र इस आशय का प्राप्त करने के निर्देश दिए गए थे कि संबंधित शिक्षक उसी महाविद्यालय में कार्यरत है और नियमित रूप से वेतन प्राप्त कर रहा है। ऐसे शिक्षक के बैंक खाते की पासबुक की छायाप्रति भी उपलब्ध कराने को कहा गया।
कुलसचिव के मुताबिक दो माह में तीन बार नोटिस के बावजूद कुल 632 संबंद्ध कॉलेजों में 171 डिग्री कॉलेजों ने कोई रुचि नहीं दिखाई। यहां तैनात शिक्षकों ने भी तैनाती के बाबत कोई रिकॉर्ड भी नहीं दिया। अंतिम नोटिस 4 जनवरी को दिया गया था। बताया कि मामले में कुलपति ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए सभी 171 कॉलेजों पर पहले चरण में कार्रवाई की संस्तुति दे दी है। कुलपति के आदेश पर इन कॉलेजों को शनिवार को पत्र लिखे गए हैं कि सत्यापन न करने के कारण इस साल विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा ऐसे कॉलेज परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। यही नहीं, ऐसे कॉलेजों में नए सत्र 2018-19 से किसी भी कक्षा या सेमेस्टर में प्रवेश लेने पर भी रोक लगा दी गई है।
कार्यपरिषद में पेश होगा फर्जी शिक्षकों का मामला
विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में शिक्षकों के फर्जी अनुमोदन के नाम पर हो रहे गोरखधंधे का मामला 31 जनवरी को विश्वविद्यालय का कार्यपरिषद की बैठक में पेश होगा। कोर्ट सदस्य ओपी सिंह ने मामले में संबंधित कॉलेजों पर पुलिस केस कराने के साथ मान्यता रद्द करने की बात कही है। जबकि कुसचिव का कहना है कि नीतिगत निर्णय के आधार पर 171 कॉलेजों को कार्रवाई का पत्र भेज दिया गया है। कार्यपरिषद से इसका अनुमोदन होगा। आगे की कार्रवाई का निर्देश मिलेगा तो उसका पालन होगा।
मान्यता भी हो जाएगी रद्द : कुलपति
अवध विवि के कुलपति प्रो. मनोज दाक्षित ने बताया कि मेरे कार्यभार संभालने पर कॉलेजों में शिक्षकों को फर्जी अनुमोदन की बात सामने आई थी। हमने पारदर्शिता लाने के लिए सभी कॉलेजों में तैनात शिक्षकों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन करने का निर्देश दिया। विश्वविद्यालय में जब काम शुरू हुआ तो 1528 शिक्षक ऐसे मिले जिनके नाम दर्जनों स्कूलों की तैनाती सूची में थे। तमाम लोगों ने अपनी सही तैनाती का हलफनामा दिया और कॉलेज ने सत्यापन भी किया। मगर 171 कॉलेज पूरी तरप चुप्पी साधे हुए हैं। यह स्थिति बर्दाश्त नहीं होगी। अभी परीक्षा केंद्र बनाने और प्रवेश लेने पर रोक लगाई गई है, अविलंब सुधार नहीं हुआ तो कॉलेज की मान्यता भी रद्द कर दी जाएगी और विश्वविद्यालय से डिग्री देने पर रोक लगा दी जाएगी।
52 कॉलेजों को मिलेगा आखिरी मौका : कुलसचिव
अवध विश्वविद्यालय के कुल 632 कॉलेजों में 171 ने फर्जी शिक्षकों के पकड़े जाने पर सत्यापन में कोई रुचि नहीं ली। जबकि 52 कॉलेजों के शिक्षकों ने अपनी तैनाती स्पष्ट करते हुए हलफनामा व दस्तावेज दिए हैं। अभी यहां के प्रबंधन ने सत्यापन नहीं किया है। कुलसचिव संजय कुमार का कहना है कि प्रबंधन को सत्यापन करने के लिए आखिरी मौका दिया जा रहा है, इसके बाद भी नहीं सत्यापन हुआ तो कार्रवाई होगी।