अयोध्या। शारदीय नवरात्र के शुरू होने के साथ ही दुर्गा पूजा महोत्सव का श्रीगणेश हो जाएगा। अयोध्या में इस बार 51 स्थानों पर दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित कर मां का पूजन-अर्चन किया जाएगा।
दो स्थानों, भगवदाचार्य स्मारक सदन व राजेन्द्र निवास पर रामलीला का आयोजन सोमवार से शुरू हो चुका है। केंद्रीय दुर्गा पूजा रामलीला समन्वय समिति अयोध्या के अध्यक्ष रमापति पांडेय ने बताया कि इस बार 51 स्थलों पर दुर्गा प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी।
प्रतिमा स्थलों का निरीक्षण किया जा चुका है। समितियों को साफ.-सफाई व अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया है। ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल मिश्र के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन पालकी से होगा, यह शुभ नहीं माना जाता है।
ऐसे में अत्यधिक वृष्टि से खेती में क्षति होगी। दुर्गा पूजा में बारिश की संभावना बन रही है। 21 सितंबर से पांच अक्टूबर तक खंड वृष्टि योग है। 27 सितंबर से हस्त नक्षत्र शुरू हो रहा है। इस कारण इसमें बारिश की प्रबल संभावना है।
पालकी या डोली पर सवार होकर मां आती हैं, तो लक्ष्मी अस्थिर होती हैं। आय से ज्यादा व्यय होता है, प्राकृतिक आपदा का योग बनता है।
मां दुर्गा का घट स्थापना का मुहूर्त
ज्योतिष गुरु स्वामी हरिदयाल मिश्र के अनुसार शारदीय नवरात्र 21 सितंबर से शुरू हो रहा है। इसी दिन कलश स्थापना कर मां की विधिवत आराधना शुरू कर दी जायेगी।
नवरात्रों में सबसे अहम माता की चौकी होती है, जिसे शुभ मुहूर्त देखकर लगाया जाता है। माता की चौकी लगाने के लिए भक्तों के पास 21 सितंबर को सुबह 6 बजकर 3 मिनट से लेकर 8 बजकर 22 मिनट तक का समय है। सुबह 7:38 से 8:10 बजे तक कन्या लग्न में कलश स्थापना अधिक शुभ रहेगा।