पूर्णिमा पर दूसरे पहर नहीं हो सकेंगे रामलला के दर्शन
अयोध्या। रामनगरी में गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है। गुरु पर्व शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचेंगे और विभिन्न मठ-मंदिरों में अपने गुरू के प्रति श्रद्धा निवेदित करेंगे। गुरु पर्व को लेकर रामनगरी मेें उत्साह का माहौल है। धार्मिक आयोजन श्रद्धा का केंद्र बने हुए हैं। गुरुपूर्णिमा पर इस बार चंद्रग्रहण का साया होगा। जिसके चलते कल (शुक्रवार) दोपहर तक ही भक्त गुरु पूजन कर सकेंगे। चंद ग्रहण के चलते 27 जुलाई को दूसरे पहर रामलला के दर्शन नहीं हो सकेंगे।
आचार्य शिवेंद्र ने बताया कि गुरु पर्व पर इस वर्ष ग्रहण का साया होगा। ग्रहण की शुरूआत 27 जुलाई की रात 11.55 बजे से होगी और ग्रहण का मोक्ष सुबह लगभग 3:51 बजे होगा। ग्रहण भारत में दिखाई देने के कारण ग्रहण से जुड़ी सभी धार्मिक मान्यताएं भी मान्य होंगी। चंद ग्रहण के चलते 27 जुलाई को दूसरे पहर रामलला के दर्शन नहीं हो सकेंगे। धार्मिक मान्यता के चलते चंद ग्रहण में 9 घंटे पहले की मंदिरों के पट बद हो जाते हैं। सूतक 27 जुलाई की दोपहर 2:55 बजे लग जाएगा। ग्रहणकाल में सूतक की शुरूआत के साथ ही मंदिरों और घरों में स्थापित भगवान के विग्रह का स्पर्श भी वर्जित हो जाता है। श्रीरामजन्मभूमि के अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि गुरुपूर्णिमा पर दूसरे पहर रामलला का दर्शन भक्त नहीं कर पाएंगे। बताया कि पहली पाली में दर्शन के बाद दूसरी पाली में सूतक के चलते मंदिर बंद रहेगा। इसी तरह हनुमानगढ़ी, कनकभवन, नागेश्वरनाथ, दशरथहमल बड़ा स्थान सहित अन्य मंदिरों के पट भी सूतक के चलते बंद रहेंगे। जिसके चलते भक्त अपने आराध्य का दर्शन 28 जुलाई की सुबह ही कर पाएंगें।पूर्णिमा के दूसरे दिन 28 जुलाई से सावन मास की शुरूआत होगी। वहीं दूसरी तरफ गुरुपूर्णिमा को लेकर रामनगरी में उल्लास का माहौल है। मंदिरों में विविध धार्मिक अनुष्ठानों की धूम है। दशरथ महल बड़ास्थान में बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य की अध्यक्षता में अखंड रामनाम संकीर्तन संचालित है। गुरुधाम में तीन दिवसीय गुरुपूर्णिमा महोत्सव की शुरूआत बुधवार से हुई। यहां विभिन्न प्रांतों से भक्तों का आवागमन शुरू हो चुका है। हरिधामगोपाल मंदिर में जगद्गुरू स्वामी रामदिनेशाचार्य के निर्देशन में महामृत्यंजय जप एवं अन्य अनुष्ठान जारी है। सुग्रीव किला में नौ दिवसीय अनुष्ठान के क्रम में आचार्य रत्नेंश के श्रीमुख से बाल्मीकीय रामायण कथा का श्रवण कर भक्त अपना जीवन कृतार्थ कर रहे हैं। इसी तरह रामनगरी के सैकड़ों मंदिरों में गुरु पर्व की धूम है।