फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जहरीली होती जा रही शहर की आबो हवा

विज्ञापन
विज्ञापन
जहरीली होती जा रही शहर की आब-ओ-हवा
विज्ञापन

फैजाबाद। शहर की आब-ओ-हवा में लगातार जहर घुल रहा है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक स्वामी नरायण का दावा है कि सरयू में जल की बीओडी (बायो डिग्रेडेबल ऑक्सीजन डिमांड) जून माह में 2.8 तक पहुंच गई है। सरयू में नहाने योग्य पानी का मानक 3 है। सिर्फ दशमलव दो प्वांइट और बढ़ जाने से नहाने योग्य पानी नहीं रह जाएगा। अप्रैल माह में वायु प्रदूषण की औसत स्थिति 82.35 माइक्रोग्राम घन मीटर रिकॉर्ड की गई है। भीषण गर्मी के कारण मई में औसत 90 माइक्रोग्राम घन मीटर तक पहुंच रहा है। हालांकि खतरनाक हालत 100 का आंकड़ा पार करने के बाद माना जाता है। ध्वनि प्रदूषण का भी बुरा हाल है। शहर में जगह-जगह पर नियमों के विपरीत डीजे फुल साउंड पर बज रहे हैं। साथ ही गाड़ियों में प्रेशर हार्न भी खूब लगे हुए है। यह सब कुछ शहर में पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा दे रहे हैं।
स्थिति अगर यूं ही आगे बढ़ती रहती तो आने वाले समय में शहर की स्थिति भयावह हो सकती है। इसके लिए पूरी तरह से जनप्रनिधियों का लचर रवैया व आम जन में जागरूकता का अभाव होना जिम्मेदार है। हालत यह है कि 10 वर्षों से शहर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन योजना का संचालन नहीं हो पाया है। इससे शहर में जल व वायु प्रदूषण को रोके जाने का कोई इंतजाम नहीं है। शहर में वर्ष 2008 के आसपास केंद्र सरकार की एक योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लाट व ठोस अपशिष्ट कूड़ा प्रबंधन योजना के संचालन करने का प्रस्ताव तत्कालीन नगर पालिका फैजाबाद व अयोध्या के पास आया था। इसमें करीब 30 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी। प्रस्ताव आने के बाद तत्कालीन नगर पालिकाओं ने भूमि के चयन में तेजी पकड़ी। इसके बाद कई स्थानों पर भूमि का चयन किया गया। पहले सभी स्थानों के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को लगाने के लिए माझा बरेहटा व कांशीराम कॉलोनी के पीछे कई स्थानों पर भूमि चिह्नित की गई। इसके बाद केंद्र सरकार की टीम ने दौरा कर लो-लैंड होने के कारण भूमि को रद कर दिया। बाद में अयोध्या नगर पालिका के लिए कांशीराम कॉलोनी के पीछे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगने की मंजूरी मिल गई। इसमें जल निगम ने प्रोजेक्ट बनाकर शासन से बजट अलाट कराकर अयोध्या नगर पालिका में सीवेरज लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया लेकिन मौजूदा समय में फैजाबाद में सीवरेज की लाइन व ट्रीटमेंट प्लांट व दोनों शहरों के लिए ठोस अपशिष्ट कूड़ा प्रबंधन योजना अभी तक लागू नहीं हो सकी है। इसके लिए मुख्य कारण भूमि का न मिलना है। दोनों योजना के लिए कम से कम 25 एकड़ व आईपीएस लगने के लिए तीन एकड़ भूमि की आवश्यकता है। अयोध्या में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट जरूर बन गया है। इसमें नाले भी ट्रैप करने की योजना है लेकिन री-साइलिंग के बाद जो पानी निकल रहा है उसका बीओडी 30 के आसपास है। यह ऑक्सीडेशन में 15 व अधिकतम 10 तक पहुंच सकता है। ऐसी परिस्थिति में ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी सरयू में प्रवाहित होकर सिर्फ प्रदूषित ही करेगा।
विज्ञापन


फैजाबाद के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट पर प्रशासन भी उदासीन
फैजाबाद के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जलनिगम ने 10 वर्ष पूर्व सर्वे किया है। पिछली सरकार के समय में धारा रोड के आगे माझा में भूमि चिह्नित की गई थी लेकिन जब जल निगम की ओर से बाउंड्रीवॉल कराने का निर्णय लिया गया तो स्थानीय लोगों के विरोध से कार्य नहीं पूर्ण हो पाया। दूसरी ओर केंद्र सरकार की अमृत योजना के लांच होने के बाद जल निगम ने दोबारा सर्वे किया। साथ ही ट्रीटमेंट प्लांट के लिए प्रशासन व नगर निगम को पत्र लिखा है। इस पर प्रशासन व स्थानीय जनप्रतिनिधियों का रवैया उदासीन बना हुआ है। इसके साथ ही ठोस अपशिष्ट कूड़ा प्रबंधन योजना में भूमि न मिलने से कार्यदायी संस्था सीएनडीएस ने प्रस्ताव को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

कूड़ा प्रबंधन के लिए नहीं है कोई नीति
अयोध्या नगर निगम में प्रतिदिन 90 टन से अधिक कूड़ा निकलता है। इसके प्रबंध को लेकर निगम के पास कोई प्लान नहीं है। यहां तक कि कूड़े की छटाई तक का कार्य नहीं किया जाता है। इसमें कार्बनिक, अकार्बनिक, बायो मेडिकल समेत घरेलू कूड़े एक ही जगह पर एकत्रित कर डम्प किए जाते हैं। हद तो यह है कि कूड़े की मात्रा अधिक हो जाने पर इसमें आग लगाकर वातावरण को प्रदूषित किया जाता है। अगर इन कूड़ों को अलग-अलग डंप कर परिवर्तित किया जाए तो भी प्रदूषण को रोका जा सकता है।

नाले ट्रैप करने की योजना अभी तक अधर में
अयोध्या नगर निगम के सभी नाले सीधे सरयू की जलधारा में प्रवाहित हो रहे है। इसको रोकने के लिए अभी तक कोई उपाय नहीं किए गए है। अभी हाल ही में जल निगम की ओर अमृत योजना के तहत अयोध्या-फैजाबाद के प्रमुख नालों को ट्रैप करने की योजना बनाई गई है, लेकिन अभी तक योजना को स्वीकृति नहीं मिली है। यह योजना नाममि गंगे के तहत परवान चढ़नी है। अभी हाल ही में जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर योजना को स्वीकृति कराने के लिए दिल्ली गए थे लेकिन अभी इसमें कोई नया मोड़ नहीं आ सका है।

धड़ल्ले से चल रहे प्रदूषण उगलते वाहन
जिले में 15 साल से अधिक वाहनों की संख्या 20 हजार से अधिक है। निर्देशों के बाद भी यह वाहन सड़कों पर काला धुआं फेंकते खुलेआम चल रहे है। अभी हाल ही में संभागीय परिवहन अधिकारी की ओर से 15 वर्ष पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन दोबारा किए जाने का नोटिस जारी किया है लेकिन यह प्रक्रिया अभी धीरे-धीरे ही रफ्तार पकड़ रही है। दूसरी ओर शहर में जगह-जगह पर बिना साइलेंसर के विभिन्न स्थानों पर खुलेआम जनरेटर वायु प्रदूषण को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं। साथ ही सीएनजी जैसे प्रस्ताव भी अभी यहां पर नहीं आ सके हैं।

50 माइक्रोन से अधिक वाली पॉलीथिन की हो रही खुलेआम बिक्री
भारत सरकार व प्रदेश सरकार के निर्देशों के बाद भी 50 माइक्रोन से अधिक वाली पॉलीथिन बाजारों में खुलेआम बिक रही है। प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से काफी दिनों से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी स्वामी नरायण बताते हैं कि पॉलीथिन की बिक्री पर रोक के लिए जल्द ही अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए उन्होंने नगर निगम को पत्र लिखा है।

रौजागांव चीनी मिल का बेसमेड का दिखने लगा कुप्रभाव
रौजागांव चीनी मिल के बगल एक बड़े भू भाग में मिल से निकलने वाले बेसमड को एकत्रित किया जाता है, यही नहीं इसके बगल अन्य मिलों से खरीदकर भी बेसमड को इकट्ठा किया जाता है, इसके बाद इसको सुखाया जाता है। यह इतना हल्का होता है कि हवा के साथ आसानी से उड़ जाता है। जिस भूभाग में इस बेसमड को जोता और सुखाया जाता है उसी के बगल में स्कूल व अस्पताल भी है। जिसमें पढ़ने वाले बच्चे व अस्पताल में भर्ती मरीजों को इस जहरीली बेसमड में सांस लेना पड़ता है। इसकी दुर्गंध इतनी रहती है कि आसपास के गांवों में इसका कुप्रभाव रहता है। बगल स्थित गांव टांडा खुलासा के मो. वहीद बताते हैं कि मिल के कुप्रभाव के चलते गांव के पश्चिमी छोर की बोरिंग जवाब देने लगी है। मौजूदा समय में यह बेसमेड लगभग आठ से नौ बीघे में फैला है।

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए नगर निगम व जिला प्रशासन को कई बार पत्र लिखा गया है। भूमि का चयन न होने के कारण फैजाबाद की सीवरेज योजना का डीपीआर नहीं बन पा रहा है।- आर बी श्रीवास्तव, पीएम, जल निगम फैजाबाद

पिछले वर्षों की अपेक्षा शहर की आब-ओ-हवा में प्रदूषण फैला है। सरयू सहित वायु में प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। इसको रोके जाने के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व ठोस अपशिष्ट कूड़ा प्रबंधन योजना का लागू होना आवश्यक है। मिलों के डिस्टीलरी से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थ खतरनाक होते हैं, जिसकी जांच की जाती है, इसके लिए प्लांट लगाए गए हैं।- स्वामी नरायण, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रक

पर्यावरण को प्रभावित कर रहा चीनी मिल व कॉलोनी के नाले से बहता दूषित पानी
जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर के एम शुगर मिल व मिल कॉलोनियों के नाले से बह रहा दूषित पानी पर्यावरण पर भारी पड़ता नजर आ रहा है। हालांकि चीनी मिल प्रबंधन ने मिल परिसर के अंदर नाले को ढक कर रखा है। बावजूद इसके हाईवे के किनारे और नाले में बहता हुआ दिखता गंदा पानी पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है। यह अलग बात है कि चीनी मिल से निकलने वाले दूषित पानी को जला देने केे लिए प्रबंधन ने संयंत्र लगा रखा है। फिर भी यह दूषित पानी किसी न किसी रूप में आम जन और फसलों को प्रभावित कर रहा है। इतना ही नहीं गंदे नाले से बहता पानी खानपुर मसौधा, भूपति पुर, धर्मदास पुर, हनुमान का पुरवा, बनके गांव, अबनपुर सरोहा, इटौरा, मिर्जा पुर समेतर कई गांवों को प्रभावित करता हुआ फसलों को भारी नुकसान होता है।
विज्ञापन


दूषित पानी नहीं जाता बाहर
केएम शुगर मिल मसौधा के अधिशासी निदेशक सुभाष चंद्र अग्रवाल ने बताया कि चीनी मील व डिस्टीलरी से कोई भी दूषित पानी बाहर निकलने ही नहीं दिया जाता। इसको जलाने के लिए चीनी मील प्रबंधन की ओर से मील परिसर में दूषित पानी जलाने का प्लांट स्थापित है।



विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें