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हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दायरे में 1885 महिलाएं

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फैजाबाद। गर्भवती महिलाओं की असामयिक मौत रोकने के लिए प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना के तहत व सीएचसी, पीएचसी आदि से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले भर में 1885 महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दायरे में पाई गई हैं। इसके अलावा 613 महिलाएं ऐसी पाई गई हैं, जिनमें सात ग्राम से कम हीमोग्लोबिन पाया गया है। सीएमओ ने सुरक्षित प्रसव कराने के लिए सभी महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए सीएचसी/पीएचसी प्रभारियों को सख्त निर्देश दिया है।
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सरकार शिशु मृत्यु दर में कमी लाने व गर्भवती महिलाओं की सेहत पर विशेष ध्यान दिए जाने के लिए नित नए फरमान जारी कर रही है, फिर भी अधिकांश महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दायरे में पाई जा रही हैं। बीते तीन दिसंबर तक जिले में कुल 57342 गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया गया है। इस दौरान 6236 महिलाएं ऐसी चिह्नित की गई हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7-11 ग्राम है। ऐसी महिलाओं को फौरी तौर पर आयरन की गोलियां मुहैया कराई गईं, साथ सेहत सुधारने के टिप्स भी दिए गए। स्वास्थ्य परीक्षण में 1885 ऐसी गर्भवती महिलाओं का चिह्नाकन किया गया, जो हाई रिस्क प्रेगनेंसी के दायरे में आती हैं। इसके अलावा 613 महिलाएं ऐसी पाई गईं हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 ग्राम से भी कम है। इनके सुरक्षित प्रसव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तमाम व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई हैं। 1885 में वे महिलाएं शामिल हैं, जो 35 वर्ष की उम्र तक पहली बार मां बन रही हैं, जिनका पिछला बच्चा ऑपरेशन से पैदा हुआ था, जिनका ब्लड प्रेशर 80 से कम व 120 ज्यादा पाया गया है और जिनमें हीमोग्लोबिन की मात्रा 7 ग्राम से कम पाई गई है।
हाई रिस्क प्रेगनेंसी का मामला मसौधा ब्लॉक में सर्वाधिक 11.16 प्रतिशत, महिला अस्पताल में 5 प्रतिशत, हैरिंग्टनगंज ब्लॉक में 7 प्रतिशत, मवई ब्लॉक में चार प्रतिशत पाया गया है। इन्हीं महिलाओं की सेहत सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग का पूरा जोर है। डीसीपीएम अमित कुमार ने बताया कि प्रत्येक नौ तारीख को सभी सीएचसी, पीएचसी में महिला एमबीबीएस व स्टाफ नर्स के साथ गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच की जाती है। सामान्यतया महिलाओं का हीमीग्लोबिन 11 ग्राम होना चाहिए। सात ग्राम से कम हीमोग्लोबिन पाए जाने पर आयरन सुक्रोज भी चढ़ाया जाता है, ताकि खून की कमी को तेजी से पूरा किया जा सके। 5 ग्राम से भी कम हीमोग्लोबिन होने पर रक्तभी चढ़ाया जाता है।
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गर्भवती महिलाओं को अस्वस्थता महसूस होने पर डॉक्टर की देख-रेख में नियमित जांच करवाते रहना चाहिए ताकि हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की स्थिति नहीं बने। गर्भवती महिला को लाल साग, पालक का साग और फलों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। नियमित कामकाज करती रहें, ताकि शरीर में मूवमेंट बनी रहे। डॉक्टर से समय-समय पर परामर्श लेते हुए कुछ हलके-फुलके व्यायाम, जो गर्भावस्था के दौरान किये जा सकते हैं, करते रहना चाहिए। -डॉ एके सिंह, वरिष्ठ महिला रोग विशेषज्ञ
सीएचसी-पीएचसी पर एएनएम के माध्यम से हाई रिस्क प्रेगनेंसी वाली महिलाओं की सेहत का नियमित परीक्षण किया जाता है। इनका प्रसव पीएचसी व उपकेंद्र पर न कराने के लिए निर्देशित किया गया है। एचबी की मात्रा 5 ग्राम से भी कम पाए जाने पर आयरन का इंजेक्शन भी दिया जा रहा है। -डॅा. अशोक कुमार गुप्ता, सीएमओ फैजाबाद
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