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बिजली उपभोक्ताओं को महंगाई का झटका

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फैजाबाद। निकाय चुनाव का परिणाम आने से पहले ही सरकार ने घरेलू बिजली दरों में इजाफा कर महंगाई का झटका दिया है। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने गुरुवार को नई दरों का ऐलान किया है।
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इससे ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं की झटका लगेगा। ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को 150 फीसदी तो किसानों को 50 फीसदी तक ज्यादा बिल देना पड़ेगा।

शहरी उपभेक्ताओं की बिजली दरों में 12 फीसदी तक बढ़ोतरी की गई है। इससे उपभोक्ताओं में आक्रोश है। राज्य विद्युत नियामक आयोग के फैसले के अनुसार अब ग्रामीण उपभोक्ताओं को पहली सौ यूनिट तक तीन रुपए प्रति यूनिट, सौ से डेढ़ सौ तक 3.50 प्रति यूनिट, डेढ़ सौ से 3 सौ यूनिट तक 4.50 रुपए चार्ज देना होगा।

50 रुपये फिक्स चार्ज भी देना होगा। इससे ग्रामीण इलाके में बिजली की दरें दोगुना तक बढ़ गई है। शहरी उपभोक्ताओं को डेढ़ सौ यूनिट तक 4.90 रुपये प्रति यूनिट, डेढ़ सौ से तीन सौ यूनिट तक 5.40 रुपये प्रति यूनिट व 3 सौ से 5 सौ यूनिट तक 6.20 रुपये प्रति यूनिट, 5 सौ से ऊपर 6.50 रुपए प्रति यूनिट देना होगा।
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ग्रामीण अनमीटर्ड कॉमर्शियल उपभोक्ताओं को एक हजार रुपये प्रति माह, सिंचाई के लिए 1150 प्रति बीएचपी बिजली मिलेगी। ग्रामीण अनमीटर्ड व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 6 सौ रुपए बढ़ाकर 1 हजार, शहरी व्यावसायिक उपभोक्ताओं को 3 सौ यूनिट तक 7 रुपए प्रति यूनिट, तीन सौ से एक हजार यूनिट तक आठ रुपए प्रति यूनिट किया गया है। शहरी व्यावसायिक फिक्स चार्ज दो सौ से बढ़ाकर तीन सौ रुपये किया गया है।

सरकारी विभागों पर 17 करोड़ बकाया
एक तरफ पावर कॉरपोरेशन बिजली दरों में बढ़ोतरी कर आम आदमी के जेब पर डाका डाल रहा है, वहीं करोड़ों के बकायेदार सरकारी विभागों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

अधिशासी अभियंता द्वितीय एसके पांडेय के अनुसार जिले के सरकारी विभागों पर तकरीबन 17 करोड़ का बकाया है। इनमें सबसे ज्यादा बकाया शिक्षा विभाग पर करीब 2.50 करोड़ का बकाया है।

मंडलीय अस्पताल पर 80 लाख, चिकित्सा विभाग पर 95 लाख, पुलिस विभाग पर 73 लाख, तहसील व ब्लाक कार्यालयों पर करीब 56 लाख का बिल बकाया है। बताया कि बार-बार लिखा पढ़ी किए जाने के बाद भी ये बकाया विभाग को नहीं मिल पा रहा है।

‘कर्जमाफी से घाटे की भरपाई कर रही सरकार’
शहरी व ग्रामीण इलाकों के उपभोक्ता बिजली दरों में बढ़ोतरी से दुखी हैं। उनका कहना है कि आम आदमी की मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान वैसे ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में बिजली की दरों में बढ़ोतरी आग में घी डालने के समान है।

फैजाबाद के अमानीगंज मोहल्ले में रहने वाले पति-पत्नी संदीप व अंजली मौर्या कहते हैं कि ये तो ज्यादती है। सब्जी, राशन के आसमान छूते दामों के बाद अब बिजली दरों में बढ़ोतरी ने तो हमारी कमर ही तोड़ दी है। अयोध्या के स्वर्गद्वार मोहल्ले के महेंद्र शुक्ला कहते हैं कि सरकारी बोझ से दबना नियति ही बन गई है।

लवकुशनगर के विकास श्रीवास्तव कहते हैं कि बिजली हमारी प्रथम आवश्यकता है, इसके दामों में बढ़ोतरी से लोगों में हताशा है। पातूपुर निवासी घनश्याम वर्मा, खोजनपुर के शिवप्रसाद पांडेय, जरायल खुर्द के दिनेश दूबे व बेनी गद्दोपुर के श्रीराम वर्मा आदि किसानों का कहना है कि सरकार एक तरफ जहां किसानों का ऋण माफ कर रही है, वहीं बिजली का बिल बढ़ाकर उस घाटे की भरपाई करना चाहती है।
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