फैजाबाद। मरीजों को विशेष स्थितियों में ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए जिला अस्पताल में लाखों रुपये लागत से लगाया गया सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम बेकार हो गया है।
संबंधित ठेकेदार द्वारा पूरी लाइन स्थापित कराने के बाद महज एक वर्ष ही चल सकी। करीब सात वर्ष से ये सिस्टम शोपीस बनकर रह गया है और मरीजों को मैनुअल सिलेंडरों से ही ऑक्सीजन मुहैया कराई जाती है।
इस सिस्टम के फेल होने से लाखों रुपये की बर्बादी हो गई है। इसके लिए जिम्मेदार कौन है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
जिला अस्पताल में मरीजों के बेहतर इलाज व विशेष परिस्थितियों में ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए वर्ष 2009 में तत्कालीन बसपा सरकार के निर्देश पर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम स्थापित किया गया था।
लखनऊ की एक कार्यदायी संस्था को लाखों रुपये का ठेका दिया गया था। कार्यदायी संस्था ने मनमाने ढंग से जिला अस्पताल के आईसीयू, इमरजेंसी सहित सभी वार्डों में ऑक्सीजन की सेंट्रल लाइन स्थापित कराई तथा धन निर्गत करा लिया।
मगर निर्माण के महज एक वर्ष बाद ही ये सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया। वर्ष 2010 से बंद पड़ा ये सिस्टम आज तक दुरुस्त नहीं हो सका।
तब से प्रदेश में तीसरी सरकार वजूद में आ चुकी है। महज एक वर्ष में आई खामियों को दूर करने की फिक्र न तो कार्यदायी संस्था को रही और न ही विभाग ने ही कोई प्रयास किया।
अब स्वास्थ्य विभाग इसकी मरम्मत कर सुचारु संचालन के लिए बजट न होने का रोना रो रहा है। एक वर्ष में ही फेल हुए इस सिस्टम की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है।
ऐसे में मौजूदा समय में मैनुअल सिलेंडरों से ही अव्यवस्थाओं के बीच ऑक्सीजन सप्लाई हो रही है। सभी वार्डों में वैक्यूम व सेक्शन सिलेंडर सहित सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम के सारे उपकरण शोपीस बने हैं।
बजट मिलने पर दुरुस्त कराएंगे सिस्टम
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव ने बताया कि, जब से उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया, ये सिस्टम बंद ही मिला। इसके संचालन के लिए कई बार विभाग में लिखापढ़ी की जा चुकी है।
बजट आने पर कंपनी इसकी मरम्मत कराकर पुन: संचालित कराएगी। डॉ. हरिओम ने बताया कि, अस्पताल में 43 ऑक्सीजन सिलेंडर हैं, जिनसे काम चलाया जा रहा है।