कोर्ट के ताजा रुख से पक्षकार खुश, जल्द फैसले की उम्मीद
अयोध्या। अयोध्या मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दायर सभी हस्तक्षेप याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस निर्णय के बाद पक्षकारों में अयोध्या मामले के शीघ्र समाधान की उम्मीद प्रबल हो गई है। पक्षकारों का कहना है कि बाहरी हस्तक्षेप बंद करने का अदालत का निर्णय सराहनीय है। बाहरी लोग ही इस मामले में बाधक बन रहे थे। अब जल्द ही अयोध्या मामले का समाधान हो जाएगा। अब इस मामले में 23 मार्च को अगली सुनवाई होगी। मुस्लिम पक्षकारों ने कहा कि अब मामले में शीघ्र निर्णय आने की उम्मीद बढ़ गई है। वहीं निर्मोही अखाड़ा ने भी बाहरी हस्तक्षेप पर ब्रेक लगाने के निर्णय का स्वागत किया। विहिप ने भी इस निर्णय को मामले को उलझाने का प्रयास करने वालों के मुंह पर तमाचा बताया।
सुप्रीम कोर्ट का रुख सराहनीय : दिनेंद्र दास
निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने सुप्रीम कोर्ट के रुख की प्रशंसा करते हुए कहा कि अब स्पष्ट हो गया है कि इस मामले में जल्द निर्णय आएगा। अयोध्या विवाद के चलते धर्मनगरी का विकास अवरुद्ध पड़ा है। बाहरी हस्तक्षेप करने वालों व राम के नाम पर राजनीति करने वालों की अब दाल नहीं गलेगी। अब इस मामले में निर्णय देने में और देरी नहीं करनी चाहिए।
अब नहीं होगी फैसला आने में देरी : इकबाल
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कोर्ट के रुख का स्वागत किया और कहा कि कुछ लोग राजनीति करने के लिए नाम करने के लिए याचिकाएं डालकर कोर्ट का समय बर्बाद करते थे। अब बाहरी हस्तक्षेप बंद हो जाएगा और सुप्रीम कोर्ट को फैसला करने में देरी नहीं होगी। हम चाहते हैं कि सबूतों के आधार पर ही फैसला किसी के भी पक्ष में हो हमें मान्य होगा।
अब नियमित होनी चाहिए सुनवाई : हाजी महबूब
पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि मामले में नियमित सुनवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने भी इस बार जल्द तारीख देकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। बाहरी लोगों पर हस्तक्षेप लगाना आवश्यक था। ये मामले को उलझाने का प्रयास कर रहे थे। हम तो चाहते ही हैं कि जल्द से जल्द इस मामले में निर्णय आए। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हमें मान्य होगा, बस देश में अमन, चैन सद्भाव बना रहना चाहिए।
राम की सत्ता स्वीकार करना चाहिए : विहिप
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने अदालत के निर्णय की सराहना की। कहा कि श्याम बेनेगल, तीस्ता, अर्पणा जैसे लोगों की याचिकाएं खारिज कर कोर्ट ने सराहनीय कार्य किया है। यह निर्णय ऐसे लोगों के मुंह पर तमाचा है, जो इस मामले को उलझाकर रखना चाहते थे। भगवान राम की सत्ता को स्वीकार करना चाहिए, अब नियमित सुनवाई होने की उम्मीद बढ़ी है कि फैसला जल्द आएगा।