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रौ में दिखी अयोध्या, सबको सुप्रीम कोर्ट से जगी उम्मीद

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सुप्रीम कोर्ट पर टिकी रहीं अयोध्या की निगाहें
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अयोध्या। अयोध्या मामले की सुनवाई एक बार फिर भले ही टल गई है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के रुख से अयोध्या वासियों में रामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद शीघ्र हल होने की उम्मीद जगी है। सभी की निगाहें बृहस्पतिवार को शुरू हुई सुनवाई पर टिकी रही। पक्षकारों को इस बात की कि खुशी है कि अब मामले में 14 मार्च से विराजमान रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड तीन ही पक्षकारों के बीच सुनवाई होगी। इन्हीं के बीच 2.77 एकड़ विवाहित भूमि को हाईकोर्ट इलाहाबाद ने अपने फैसले में बराबर-बराबर जमीन का बंटवारा किया था।
पक्षकारों का कहना है कि तमाम लोग सुप्रीम कोर्ट में पार्टी बनने के लिए कतार लगाए थे, जिन्हें दरकिनार कर टाइटिल सूट के रूप में विवाद की सुनवाई करने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश बड़ा कदम है। वहीं, मामले में राजनीतिक व भावनात्मक बिंदुओं पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी भी लोगों ने सराही। मामले को लेकर चौक-चौराहों पर लोग अयोध्या मसले पर ही चर्चा करते आए। हालांकि चर्चाओं के बीच रामनगरी अयोध्या अपनी रौ में रहीं। मंदिरों में घंटा-घड़ियाल व रामधुन के बीच दर्शन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। सरयू पूजन को पहुंचे संत आनंद शास्त्री ने कहा कि जितनी जल्दी यह मामला निपटेगा, उतनी ही जल्दी अयोध्या की भी सूरत बदलेगी। नयाघाट पर मौजूद युवा छात्र सौरभ मिश्र ने कहा कि अयोध्या के विकास के लिए यह मामले निपटना जरूरी है। कारोबारी राकेश चौरसिया बोले कि विवाद खत्म होने से अयोध्या के विकास को पंख लगेंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
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हम चाहते थे टाइटिल सूट का ही मुकदमा चले : हाजी महबूब
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा कि कोर्ट का निर्णय सराहनीय है। हम लोग पहले भी मांग करते थे कि सुप्रीम कोर्ट टाइटल पर ही सुनवाई करे, जिसे अब समर्थन मिला है। कहा कि अब इस मामले को नहीं टाला जाना चाहिए, जल्द से जल्द इसका निर्णय आना चाहिए। भूमि जिसके रिकॉर्ड में दर्ज हो उसे दे देनी चाहिए।

बहुत खोया, अब हो जल्द फैसला : इकबाल
मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि नए पक्ष को दरकिनार कर कोर्ट ने सराहनीय कार्य किया है। अब मामला लंबा नहीं खिंचेगा। कोर्ट जिसके हक में निर्णय देगा, वह हम सभी मानेंगे। बस हम अब अयोध्या मामले का शीघ्र समाधान चाहते हैं, इस विवाद के चलते अयोध्या ने बहुत कुछ खोया है।

नए पक्षों को शामिल न करने का निर्णय सराहनीय : महंत दिनेंद्र दास
मामले में पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि कोर्ट को अब मामले की सुनवाई लंबे समय तक नहीं टालनी चाहिए। हम चाहते हैं कि अयोध्या विवाद का शीघ्र समाधान हो। कहा कि मामले में नए पक्ष को शामिल न करने का निर्णय स्वागत योग्य है। हमें उम्मीद है कि 2018 में ही निर्णय आ जाएगा।

टाइटल सूट पर सुनवाई करने का निर्णय सराहनीय: धर्मदास
हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास ने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि टाइटल सूट पर सुनवाई करने का निर्णय सराहनीय है। अब कुछ ही दिनों में अयोध्या मामले का समाधान हो जाएगा। इसमें कोई शक नहीं कि फैसला हमारे ही पक्ष में आना है।

तारीख पर तारीख देना बंद होना चाहिए: आचार्य सतेंद्र
रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि अयोध्या मामले में तारीख पर तारीख देना बंद होना चाहिए। हम यह मामला शीघ्र अति शीघ्र हल होने की आवश्यकता है। अयोध्या मामले के समाधान से ही रामनगरी के विकास की उम्मीद जगेगी। निर्णय में देरी नहीं होनी चाहिए।

टेंट से आजाद होंगे रामलला : विहिप
विहिप के मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत है और हमें उम्मीद भी है कि अब वह दिन दूर नहीं जब रामलला टेंट से आजाद होंगे।

नियमित सुनवाई न होने से अफसोस : नृत्यगोपाल दास
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष और मणिराम दास छावनी महंत नृत्य गोपाल दास ने कहा कि हम न्यायालय का सम्मान करते हैं लेकिन काफी विलंब हो गया है। नियमित सुनवाई न होना अफसोस की बात है। आशान्वित होते हुए कहा केंद्र में मोदी जी के रहते इसका समाधान अवश्य हो जायेगा। हिंदुओं की आशाओं और संकल्पों की सिद्धि अवश्य पूरी होगी।
विहिप के केंद्रीय सलाहकार सदस्य पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने कहा अफसोस हुआ कि पुन: तिथि 14 मार्च तक बढ़ गयी। न्यायायिक प्रक्रिया है, विलंब तो होगा ही। केन्द्रीय मार्गदर्शक मंडल सदस्य महंत कन्हैया दास ने कहा हिंदुओं की सामूहिक इच्छाओं की पूर्ति होगी। रामलला अपने भव्य मंदिर में अवश्य विराजमान होगें।

कोर्ट तय करेगी 2.77 एकड़ भूमि पर किसका हक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को अयोध्या मामले में सुनवाई करते हुए स्पष्ट कर दिया कि मामले को जमीन विवाद की तरह देखेंगे। अब कोर्ट यह तय करेगी कि 2.77 एकड़ भूमि पर किसका हक है। राममंदिर के आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा गिरा दिया गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को अयोध्या टाइटल विवाद में फैसला देते हुए विवादित जमीन को तीन बराबर हिस्सों में बांट दिया। जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को, सीता रसोई और रामचबूतरा निर्मोही अखाड़ा को, जबकि बाकी का एक तिहाई लैंड सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया गया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच गया। अब सुप्रीम कोर्ट तय करेगी कि यह भूमि किसकी है।
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खोदाई की रिकॉर्डिंग समेत गीता-रामायण से अकबरनामा तक देगा सुबूत
सुप्रीम कोर्ट में बृहस्पतिवार को बहुप्रतीक्षित रामजन्मभूमि मामले की सुनवाई शुरू हुई तो हिंदुओं के पवित्र धर्मग्रंथ गीता और रामायण को भी सामने रखा गया। चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता में तीन जजों की बेंच ने साफ कर दिया कि अदालत में कोई भावनात्मक दलीलें न रखीं जाएं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्य के तौर पर गीता और बाल्मीकि रामायण के कुछ अंश का अंग्रेजी में अनुवाद करने को कहा है। बताया जा रहा है कि एएसआई की खोदाई के समय की वीडियो रिकॉर्डिंग भी अदालत में रखी जाएंगी। एएसआई की ओर से 1970,1992 व 2003 में विवादित भूमि की खोदाई की गई थी।
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