आर्डर के बाद भी नहीं मिल रही एआरवी, भटक रहे मरीज
फैजाबाद। कुत्ते काटने पर लगाई जाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन की जिला अस्पताल में शॉर्टेज होने से पिछले एक सप्ताह से प्रतिदिन दर्जनों मरीजों को वापस लौटना पड़ रहा है। यह इंजेक्शन लगाने के लिए इन दिनों अस्पताल में पहले आओ, पहले आओ की नीति चल रही है।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन अमूमन 50-60 से अधिक मरीजों को लगाया जाने वाला यह इंजेक्शन इन दिनों महज 20-30 मरीजों को ही लगाया जा रहा है। कमी के कारण सुबह दस बजे के बाद आने वाले अधिकांश मरीजों को लौटना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार आर्डर के बाद भी पर्याप्त मात्रा में एआरवी उपलब्ध न हो पाने से यह दिक्कत आ रही है। इन दिनों स्टाक अपर्याप्त होने की वजह से जिला अस्पताल में दूरदराज से कुत्ते आदि के काटने पर एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के लिए मरीजों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
यहां प्रतिदिन अमूमन 60 मरीजों को एआरवी लगाई जाती है, लेकिन इन दिनों स्टॉक की कमी से शनिवार को महज 37, शुक्रवार को लगभग 22 मरीजों को यह इंजेक्शन लगाया जा सका। इसके बाद सोमवार के लिए कुछ स्टाक बचाकर अन्य मरीजों को सोमवार को आने के लिए कहकर लौटा दिया गया।
शनिवार को सोमवार के लिए 22 इंजेक्शन स्टॉक में रखा गया है। प्राइवेट अस्पतालों में यह इंजेक्शन लगाने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार सौ का स्टाक होने पर भी आर्डर कर दिया जाता है, लेकिन वहां से मिलने में ही देरी हो जाती है, जिसकी वजह से यह दिक्कत उत्पन्न हो जाती है।
इस बाबत सीएमएस डॉ. हरिओम श्रीवास्तव गत माह 6 सौ एआरवी का आर्डर किया गया था जिसके सापेक्ष महज 3 सौ ही मिल सकीं। एक सप्ताह पूर्व भी दो हजार एआरवी के लिए आर्डर किया गया है लेकिन अभी तक नहीं मिल सकी। श्रीराम अस्पताल में महीनों से यह इंजेक्शन नहीं लग रहा है, जिससे मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है, इस कारण स्टॉक कम हो गया है। शीघ्र ही यह समस्या दूर हो जाएगी।
ये है एंटी रैबीज वैक्सीन
कुत्ता, बंदर, सुअर, चमगादड़ आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुलन को खराब कर देता है। उसी से बचाव के लिए कुत्ता काटने के 10 दिन बाद यदि कुत्ते की मौत हो जाती है तो आवश्यक रूप से एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाना आवश्यक होता है। हालांकि एहतियातन लोग काटने के तुरंत बाद ही इंजेक्शन लगवाने के लिए अस्पताल का चक्कर लगाने लगते हैं।