‘संस्कृत भाषा को अपडेट करने की जरूरत’
अयोध्या। शिक्षा का अभिप्राय संस्कार विकसित करना है। एक सौ दो अरब 78 करोड़ शब्द संस्कृत भाषा में हैं। नासा 2034 में संस्कृत आधारित कंप्यूटर लांच करने जा रहा है। हमारी भाषा की स्पष्टता ही हमें विशेष बनाती है। आज हिंदी व संस्कृत भाषा पर विशेष ध्यान देने के साथ ही संस्कृत भाषा को अपडेट करने की जरूरत है।
उक्त बातें भारतीय शिक्षण मंडल एवं गुरू वशिष्ठ सेवा न्यास के तत्वाधान में आयोजित हमारी अवधारणा का गुरुकुल विषयक संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए एसआर ग्रुप लखनऊ के प्रबंध निदेशक पवन सिंह चौहान ने कहीं। अवध विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि शिक्षा में अनिवार्यता एवं बंधन समाप्त होना चाहिए। छात्र को अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना आवश्यक है। नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास ने कहा कि आज पाश्चात्य सभ्यता हावी हो रही है, संस्कृत को विश्वव्यापी बनाना होगा। शिक्षण मंडल के सदस्य गोष्ठी के मुख्य वक्ता दत्तराज पांडेय ने कहा कि पूर्ण शिक्षा व्यवस्था में परिवर्तन की जरूरत है। संचालन एवं अतिथियों का स्वागत गोष्ठी के संयोजक डॉ. दिलीप सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉक्टर एचबी सिंह, प्रो.रामलखन सिंह, प्रोफेसर केके वर्मा, डासक्टर आरके सिंह सहित वेदपाठी छात्र मौजूद रहे।