नित्य रामकथा शुरू नहीं होने से संतों में आक्रोश
अयोध्या। केंद्र में मोदी सरकार और प्रदेश में योगी सरकार होने के बावजूद रामनगरी अयोध्या के रामभक्तों की आस पूरी नहीं हो पा रही है। डेढ़ वर्ष से बंद अयोध्या के तुलसी स्मारक भवन में नित्य रामकथा शुरू नहीं हो सकी है। जबकि बंद चल रही रामलीला योगी के सत्ता संभालते ही शुरू हो गई थी। इसका बजट भी मिल गया था।
अयोध्या के तुलसी स्मारक भवन में अयोध्या शोध संस्थान की ओर से 21 दिसंबर 2012 को नित्य रामकथा की शुरूआत हुई थी। हालांकि कुछ माह बाद ही एक अप्रैल 2013 को धनाभाव बताकर नित्य रामकथा के साथ नित्य रामलीला भी बंद करा दी गई। सपा सरकार में मंत्री रहे तेजनारायण पांडेय के प्रयास से नित्य रामलीला व रामकथा का क्रम पुन: शुरू हुआ, लेकिन ये भी लंबे समय तक नहीं चल सका और मात्र दो वर्ष बाद एक अप्रैल 2015 को नित्य रामकथा एक बार पुन: बंद हो गई। इसे लेकर रामनगरी के संतों ने आक्रोश जताया तो तत्कालीन प्रदेश सरकार ने छह अप्रैल 2015 को तीसरी बार नित्य रामकथा शुरू करा दी। 23 नवंबर 2015 की रात अयोध्या शोध संस्थान के संस्थापक अविनाश श्रीवास्तव ने आत्महत्या कर ली, जिसके बाद 24 नवंबर से रामकथा व रामलीला पर विराम लग गया।
इसके बाद कई बार रामलीला व रामकथा शुरू कराने की आवाज बुलंद हुई मगर कोई परिणाम नहीं आया। इसी बीच प्रदेश में भाजपा सरकार आई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। उन्होंने संतों की भावनाओं का सम्मान करते हुए नित्य रामलीला तो बहाल करा दी मगर नित्य रामकथा पर अभी भी ग्रहण लगा है। अयोध्या शोध संस्थान के लोग इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
नित्य रामकथा की बहाली को लेकर रामनगरी के कथा व्यास सतत प्रयत्नशील रहे हैं। इसके लिए गत दिनों अयोध्या आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या को ज्ञापन दिया जा चुका है। सांसद व नगर विधायक को भी ज्ञापन देकर नित्य रामकथा को शुरू कराने की मांग उठाई गई। मगर अभी तक कोई परिणाम नहीं आया। कथा व्यास पवन दास शास्त्री कहते हैं कि रामभक्तों के शासन में भी रामकथा पर ग्रहण चिंतनीय है। यदि शीघ्र ही रामकथा शुरू नहीं कराई गई तो संत आंदोलन को बाध्य होंगे।