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ब्लड बैंक में प्लेटलेट्स खत्म, मशीन खराब

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ब्लड बैंक में प्लेेटट्स खत्म, मशीन खराब
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अयोध्या। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में प्लाज्मा व प्लेटलेट्स बनाने वाली रेफ्रिजरेटेड सेंट्रीफ्यूज मशीन खराब हो गई है। तीन माह से प्लाज्मा व प्लेटलेट्स बनना बंद हो गया है। ऐसे में डेंगू मरीजों को लखनऊ रेफर करना मजबूरी होगी।

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट स्थापित है। यहां पर लगी मशीन के माध्यम से रक्त के अवयव को अलग-अलग किया जाता है। जिससे ब्लड के साथ ही प्लाज्मा व प्लेटलेट्स बनाया जाता है।
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प्लेटलेट्स की मांग सबसे ज्यादा डेंगू की बीमारी में होती है। मच्छरों के काटने से फैल्ने वाला डेंगू एक घातक बीमारी है। डेंगू होने के बाद ब्लड में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार घटने लगती है। यह रक्त का मुख्य अवयव है।

डेंगू के मरीजों के उपचार के लिए प्लेटलेट काम में आता है। वही प्लाज्मा जले हुए मरीजों के उपचार के काम तथा है। गर्भावस्था में महिलाओं में अधिक रक्त का स्राव हो जाने में भी इसकी आवश्यकता पड़ती है।

अप्रैल माह शुरू होते ही तेज धूप व हवाओं का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे आए दिन आगजनी की घटनाएं हो रही हैं। एक माह बाद ही डेंगू, मलेरिया आदि का प्रकोप भी बढ़ना शुरू हो जाएगा, ऐसे में प्लाज्मा व प्लेटलेट्स की आवश्यकता पड़ेगी।

लेकिन तीन माह से जिला अस्पताल में प्लेटलेट्स व प्लाज्मा का स्टॉक शून्य हो है, क्योंकि प्लेटलेट्स व प्लाज्मा नहीं बन रहा है। इसका कारण है कि यहां स्थापित रेफ्रिजरेटेड सेंट्रीफ्यूज मशीन खराब है।

ऐसे में डेंगू के मरीजों के लिए इस बार जिला अस्पताल मुफीद नहीं होगा और इलाज की माकूल व्यवस्था नहीं उपलब्ध हो पानी में दिक्कत हो सकती है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार इसकी मरम्मत के लिए कई बार प्रयास किया गया। इंजीनियर को सफलता हाथ नहीं लगी। अब इसे बदला जाना है। करीब 22 लाख की लागत से आने वाली मशीन को खरीदना भी अस्पताल प्रशासन के बस की नहीं है।

क्योंकि सिर्फ दो लाख तक की खरीद के लिए ही जिला अस्पताल अधिकृत है। इसलिए अब शासन को लिखा-पढ़ी की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एके राय ने कहा कि प्लेटलेट्स व प्लाज्मा बनाने वाली रेफ्रिजरेटेड सेंट्रीफ्यूज मशीन खराब है।

इसकी मरम्मत के लिए काफी प्रयास किया गया, लेकिन मरम्मत नहीं हो सकी। अब नई मशीन लगाने के लिए निदेशालय को पत्र भेजा जा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी अयोध्या डॉ. एमए खान ने कहा कि डेंगू, मलेरिया व अन्य संक्रामक रोगों का कहर जुलाई से लेकर अक्तूबर के मध्य होता है।
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डेंगू के सभी मरीजों को प्लेटलेट्स नहीं चढ़ाई जाती, जिनमें प्लेटलेट्स 20 हजार तक पहुंच जाती है, उन्हें ही प्लेटलेट दी जाती है या शरीर के किसी भी अंग से रक्त स्राव होने पर चढ़ाई जाती है। तब तक वैकल्पिक इंतजाम हो सकते हैं।
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